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बिलासपुर: शहीद होने से एक दिन पहले राकेश ने पिता से किया था ये वादा, लेकिन नहीं हो पाया पूरा


पिता जी! आप अधरंग से पीड़ित हैं। सुबह थोड़ा-थोड़ा चला कीजिए ताकि शरीर में हरकत होती रहे। घर के काम की चिंता मत कीजिए। गेहूं की कटाई के लिए मैं छुट्टी लेकर मैं खुद घर आ रहा हूं।

बीते मंगलवार को यही बातें शाहतलाई के घुमारपुर गांव के शहीद राकेश कुमार ने फोन पर अपने पिता चिरंजी लाल से कही। लेकिन अगले ही दिन राकेश के शहीद होने की खबर मनहूस खबर आई। हिमखंड से बेटे की मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पत्नी बेसुध हैं तो दोनों बेटे खामोश। बीमार माता-पिता के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। चिरंजी लाल ने बताया कि राकेश जुलाई 2018 में दो महीने की छुट्टी काटकर गया था। वह खुद ही फसल का काम करके जाता था। उन्होंने बताया कि बुधवार को उन्हें किसी का फोन आया।

उसने मेरा हालचाल पूछा और राकेश के बारे में पूछकर फोन काट दिया। मुझे शक हुआ। उसके बाद फिर फोन आया तो राकेश के शहीद होने की सूचना मिली। शाहतलाई के गांव घुमारपुर में दो दिनों से किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। पूरे गांव में मातम छाया है।

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