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हिमाचल प्रदेश में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है साइबर क्राइम: सावधान!


हिमाचल प्रदेश में साइबर क्राइम दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है. आए दिन लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं. पुलिस मुख्यालय स्थित साइबर क्राइम थाने के मुताबिक प्रदेश में नौकरी का झांसा, एटीएम फ्रॉड, जीओ टावर लगवाने, पेट्रोल पंप दिलवाने और इंशोयरेंस क्लेम के नाम पर ठगी की जा रही है. साइबर अपराधी फर्जी सिम और इंटरनेट से फोन कर लोगों को फांस रहे हैं. इसके अलावा अन्य कई तरीकों से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.

ऑनलाइन ठगी के आंकड़ों की बात करें तो 2016 में जहां 519 मामले सामने आए थे तो यह संख्या 2017 में 570 तक जा पहुंची. वहीं 2018 में ऑनलाइन ठगी के 981 मामले दर्ज किए गए. आईटी एक्ट के तहत साल 2016 में प्रदेश में 28 एफआईआर हुई थी और यह आंकड़ा 2018 में 66 FIR तक जा पहुंचा. प्रदेश में हर साल औसनत 1 करोड़ रूपए की ठगी होती है. 

साइबर क्राइम थाने से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में छोटा शिमला थाने के तहत महिला से हुई 10 लाख रूपए की ठगी के मामले के तार दक्षिण अमेरीकी देश वेनेजुएला से जुड़े हैं. फेसबुक के जरिए महिला से ठगी करने वाला अपराधी वेनेजुएला में बैठकर चैट कर रहा था और तोहफे भेजने की आड़ में महिला से 10 लाख रूपए की लूट लिए.

बता दें कि साइबर क्राइम में प्रमुख तौर पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स, मोबाइल एप्प, ई-मेल से ठगी की जाती है. एटीएम से लेकर अन्य कार्डों तक कई तरह के ऑनलाइन फ्रॉड किए जाते हैं. इस बाबत साइबर क्राइम के DSP नरवीर सिंह राठौर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.

डीएसपी का कहना है कि साइबर अपराधी बहुत शातिर होता है. विभिन्न वेबसाइटों और अन्य कई माध्यमों से लोगों का डाटा लिया जाता है और फिर फर्जी सिम और इंटरनेट से कॉल की जाती है. जिसे ट्रेस कर पाना मुश्किल होता है. डीएसपी ने कहा कि किसी तरह का कोई भी फोन आता है तो उसके बारे में खुद जांच लें. जहां तक रिकवरी की बात है तो पैसे वापस मिलना टेढ़ी खीर साबित होता है, लेकिन फिर हिमाचल के साइबर क्राइम थाने ने साल 2018 में 9 लाख 59 हजार 186 रूपए लोगों को वापस दिलवाए हैं. जबकि 2017 में 3 लाख 24 हजार 607 रूपयों की ही रिकवरी हो पाई थी.

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