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मोहब्बत न जाति देखती है और मजहब, Twitter पर हुई दोस्ती, ऐसे एक दूजे के हो गए श्रीलंका की हंसनी और भारत का लड़का

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मोहब्बत न जाति देखती है और मजहब, दो मुल्कों की सरहदें भी इसे नहीं रोक सकती। यह बात श्रीलंका की हंसनी और कुचड़ौद के गोविंद की प्रेम कहानी ने सिद्ध कर दी। तीन साल पहले ट्विटर पर हुई दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी और देखते-देखते प्रेम में बदल गई। दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया। वैलेंटाइन डे वीक में रविवार को दोनों परिजन की उपस्थिति में विवाह बंधन में बंध गए। 

जानकारी के मुताबिक दोनों ट्वीवटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फालोअर्स हैं, एक बार गोविंद ने प्रधानमंत्री के किसी ट्वीट को लाइक किया तभी हंसनी ने भी उसे लाइक किया। इस पर गोविंद ने देखा किया वह कौन है, धीरे-धीरे ट्वीटर पर हुई दोस्ती प्यार में बदल गई।

मंदसौर जिले के कुचडौद निवासी गोविंद पिता रामानुज दुरग (माहेश्वरी) (26) और श्रीलंका की हंसनी ईरानमली इधीरीसिंगे (25) की दोस्ती 2015 में ट्विटर पर हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती परवान चढ़ी और इसे प्यार के मीठे रिश्ते में बदलते देर नहीं लगी। जुलाई 2017 में हंसनी पहली बार भारत आई तो गोविंद नई दिल्ली एयरपोर्ट पर उसे रिसीव करने पहुंचे। वहां से दोनों कुचड़ोद आए, गोविद ने परिजनों से हंसनी की मुलाकात कराई। बेटे की तरह परिजन को भी हंसनी भा गई तो शादी की बात तय हो गई। रविवार (वसंत पंचमी) को हंसनी और गोविंद का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्ना हो गया।

15 रिश्तेदार श्रीलंका से आए: शादी में गोविंद के सैकड़ों रिश्तेदारों शामिल हुए। दुल्हन हंसनी के माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के 15 सदस्य शादी में शामिल होने श्रीलंका से मंदसौर पहुंचे। उन्होंने विवाह के संस्कारों को कौतुहल से देखा और उसमें भाग लिया।

चंडीगढ़ में ही रहेंगे: गोविंद इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुका है और हंसनी चंडीगढ़ में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। गोविंद ने बताया कि पिता रामानुज दुरग कुचड़ौद में खेती करते हैं। हंसनी के पिता इरानमली ईरीधीसिंगे श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट में नामी वकील हैं और मां व्याखाता हैं। हंसनी और गोविंद ने भविष्य के बारे में अभी फैसला नहीं किया है, फिलहाल वे चंडीगढ़ में ही रहेंगे।

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