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एक साथ भर्ती हुए थे चार दोस्त पुलिस में, सबने एक-एक कर चुनी ऐसी मौत

एक साथ भर्ती हुए थे चार दोस्त पुलिस में, सबने एक-एक कर चुनी ऐसी मौत

एक साथ भर्ती हुए थे चार दोस्त पुलिस में, सबने एक-एक कर चुनी ऐसी मौत: कहानी एक पहेली सी बन गई हैं। इनमें से तीन सिपाहियों ने फांसी लगाकर जान दी, जबकि चौथे ने शुक्रवार देर रात सरकारी असलहे से गोली मारकर अपनी जिंदगी की डोर काट ली।
बड़ी बात यह है कि किसी ने भी कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इन दोस्तों ने खुद ही मौत का रास्ता क्यों चुना? पुलिस मुख्यालय ने सिपाहियों की मौत के कारणों की जांच कराने के आदेश दिए हैं।

मौत को गले लगाने वाले उत्तराखंड पुलिस के चारों जवान विपिन सिंह भंडारी, जगदीश सिंह, हरीश और चंद्रवीर सिंह 2012 बैच के थे। पुलिस ट्रेनिंग के दौरान उनकी दोस्ती जगजाहिर रही।

एक-एक कर दुनिया से अलविदा कह गए

काफी समय तक चाराें दोस्त साथ में रहे, लेकिन अचानक उनकी दोस्ती को ऐसा ग्रहण लगा कि एक-एक कर वो दुनिया से अलविदा कह गए। विजिलेंस मुख्यालय पर सिपाही चंद्रवीर सिंह की खुदकुशी के बाद दिन भर उनकी मौत सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी रही।

बताया जा रहा है कि सबसे पहले सिपाही विपिन सिंह भंडारी डिप्रेशन का शिकार हुआ। हरिद्वार में क्यूआरटी में तैनाती के दौरान अचल आनंद धाम के कमरे में उसका शव फांसी पर लटका मिला था। भंडारी भी मूल रूप से पौड़ी का रहने वाला था।

भंडारी ने यह कदम क्यों उठाया, यह रहस्य उजागर होने के बजाए अन्य दोस्तों की मौतों के साथ गहराता चला गया। दूसरे साथी हरीश का शव हरिद्वार में सिंह द्वार के पास एक सरिए पर लटका मिला, जबकि बाइक सड़क किनारे खड़ी मिली थी। तीसरे साथी जगदीश बिष्ट ने भी खुद ही मौत को गले लगा लिया। उसका शव भी सिडकुल स्थित कमरे में फांसी पर लटका मिला था।

पुलिस महकमा उलझन में

महकमे में चर्चा है कि जगदीश बिष्ट की मौत के बाद से सिपाही चंद्रवीर सिंह की मनोदशा ठीक नहीं थी। उस समय चार में से तीन दोस्तों की मौत की कहानी सुर्खियां बनी थी। इसी कड़ी में हरिद्वार की तत्कालीन एसपी सिटी ममता बोहरा ने मनोवैज्ञानिक मुकुल वर्मा से क्यूआरटी में तैनाती के दौरान चंद्रवीर सिंह की काउंसलिंग भी कराई थी।

कुछ समय के लिए सिंह को अवकाश पर भेज दिया गया था, लेकिन बाद में वह ड्यूटी पर लौट आया था। 18 जनवरी को चंद्रवीर सिंह का स्थानांतरण हरिद्वार से देहरादून कर दिया गया था, क्योंकि उसका परिवार डोईवाला में रहता था।

पांच दिन पहले ही सिंह को विजिलेंस मुख्यालय की सुरक्षा गारद में भेजा गया था, जहां पर रात में आत्महत्या कर चंद्रवीर सिंह ने चार दोस्तों की मौत की पटकथा को पूरा कर दिया। बड़ी बात यह है कि चारों दोस्तों में से किसी ने भी मौत की वजह उजागर करने की जरूरत नहीं समझी। उत्तराखंड पुलिस में आकर मित्रता, सेवा और सुरक्षा का संकल्प लेने वाले इन चार जवानों की मौत से खुद पुलिस महकमा उलझन में है।

महज डेढ़ साल में ही चले गए चारों

चारों दोस्तों ने महज डेढ़ साल के अंतराल में ही मौत को गले लगा लिया। तीन दोस्तों ने हरिद्वार में अपनी जान दी। चौथे दोस्त का महकमे ने हद्विार में मनोचिकित्सक से इलाज कराया और देहरादून के लिए तबादला कर दिया था। लेकिन हरिद्वार से आने के महज बीस दिन बाद ही चंद्रवीर सिंह ने देहरादून में खुदकुशी कर ली।

उत्तराखंड पुलिस के चार सिपाहियों की मौत किन परिस्थितियाें में हुई है, यह जानना जरूरी है। कुछ तो है इसमें, जांच कराएंगे। कोई ना कोई डिप्रेशन था, क्या टोटका था। एसपी सिटी श्वेता चौबे को जांच के आदेश दिए गए है।  

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