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बीजेपी की पहली लिस्ट के 250 नाम फाइनल !


लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पहली लिस्ट का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। खबर है कि सत्ताधारी पार्टी ने करीब 250 नाम फाइनल कर लिए हैं। इस लिस्ट में कई नामों का शामिल होना चौंका सकता है वहीं कई का न होना हैरान भी करेगा। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की संसदीय कमिटी द्वारा तैयार की गई लिस्ट में कई दिग्गजों का टिकट कटना तय है। ऐसे में सबके सामने सवाल है कि लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इसबार चुनाव लड़ेंगे या नहीं।

मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के पूर्व सीएम बी सी खंडूरी और बी एस कोश्यारी ने खुद से चुनाव नहीं लड़ने का मन बनाया है। दोनों नेता चाहते हैं कि युवाओं को मौका दिया जाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र (2014 में देवरिया से जीते) और पूर्व डेप्युटी स्पीकर करिया मुंडा भी चुनाव नहीं लड़ने के पक्ष में है। इससे इस बात की संभावनाएं बढ़ गई हैं कि लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के सीएम शांता कुमार को भी चुनावी दौड़ से बाहर कर दिया जाए या वे खुद अपना नाम आगे न बढ़ाएं।

बता दें कि अडवाणी फिलहाल 91 साल के है और मुरली मनोहर जोशी के साथ उन्हें भी पार्टी नेतृत्व ने 2014 में ही मार्ग दर्शन मंडल में शामिल कर दिया था। तब बीजेपी ने संघ परिवार के साथ मिलकर तय किया था कि 75 साल से ऊपर के किसी शख्स को कार्यकारी जिम्मेदारियां नहीं दी जाएंगी।

आजादी के बाद भारत अप्रैल 2019 में अपने 17वें लोकसभा चुनाव का गवाह बनेगा। पिछले 16 आम चुनावों में देश और चुनाव के तरीकों में बहुत कुछ बदलाव आए हैं। अबतक हुए चुनावों से जुड़ी 10 रोचक जानकारी यहां दी जा रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव पर कुल खर्च 50 हजार करोड़ (अनुमान) आएगा। यूएस चुनाव (2016) पर खर्च हुए थे 42 हजार करोड़, जिसे पीछे छोड़कर यह चुनाव सबसे महंगा होगा। 2014 लोकसभा चुनाव पर 30 हजार करोड़ का खर्च आया था।

बता दें कि आडवाणी अबतक गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। देश के गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी लगातार 6 बार गांधीनगर लोकसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। 1984 में बीजेपी को दो सीटों से 180 सीटों तक पहुंचाने वाले लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल राजनीति के केंद्र में नहीं हैं। 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी का विरोध किए जाने के बाद से वह पार्टी में भी एक तरह से हाशिये पर ही हैं।

वहीं कानपुर से सांसद जोशी को टिकट मिलने के चांस भी कम हैं। खबरें थी कि उनके समर्थक प्रचार की तैयारियों में जुटना चाहते थे लेकिन जोशी ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया था कि अभी टिकट ही पक्का नहीं है।

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