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BPL सूची में शामिल होने का अब तक नहीं मिला कोई लाभ


जो परिवार बी.पी.एल. में चयनित हो उसे मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाना संबंधित विभागों का दायित्व है लेकिन सलूणी उपमंडल में एक ऐसा बी.पी.एल. परिवार मौजूद है जो 21वीं सदी में भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते पाने को तरस रहा है। ग्राम पंचायत डांड के गांव डूगसु के रहने वाले क्यूंम खान का परिवार बी.पी.एल. सूची में तो शामिल है लेकिन इस वर्ग में शामिल होने के बावजूद उसे आज तक उन सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है जिनका वह पात्र है। यहां तक कि आज भी क्यूंम खान की पत्नी को खाना बनाने के लिए चूल्हे में आग जलानी पड़ती है।

इस स्थिति के बीच इस परिवार के लिए मुफ्त रसोई गैस योजना कोई मायने नहीं रखती है। क्यूंम खान का मिट्टी से बना घर क्षतिग्रस्त हो चला है तो साथ ही घर की दीवार पर मोटे-मोटे अक्षरों से इस परिवार के बी.पी.एल. में होने की बात लिखी गई है, वह भी अब फीकी पड़ चुकी है मगर क्यूंम खान को अभी तक किसी भी आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। घर में बिजली न होने के चलते क्यूंम खान के दोनों बच्चे दीये की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कुछ दिन पहले सरकार ने जिला चम्बा के कुछ क्षेत्रों में स्टडी लैंप स्कूली बच्चों को वितरित किए लेकिन इन बच्चों को वे लैंप भी अभी तक नसीब नहीं हुए हैं।

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