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Himachal: बड़ा भूकंप आया तो हिमाचल के इन तीन शहरों में होगी तबाही


हिमाचल में यदि अब 1905 की तीव्रता वाला भूकंप आता है तो शिमला, कांगड़ा और मंडी जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान होगा। ऐसी प्राकृतिक आपदा में करीब पौने दो लाख तक लोगों की जान जा सकती है। चार अप्रैल, 1905 को हुए भूकंप की वर्षगांठ पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एचके गुप्ता ने यह बात कही।गुप्ता धर्मशाला कॉलेज के त्रिगर्त सभागार में कांगड़ा में आए भीषण भूकंप की स्मृति में आपदा प्रबंधन की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला का आयोजन हिमाचल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और केंद्रीय विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से हो रहा है।

114 साल पहले कांगड़ा में आए भीषण भूकंप में कई जानें चली गईं थीं, कई इमारतें ध्वस्त हो गईं, जिनमें ऐतिहासिक कांगड़ा, नूरपुर, नेरटी जैसे राजाओं के किले और प्राचीन मंदिर भी शामिल हैं।

मुख्यातिथि एचके गुप्ता ने कहा कि हिमाचल भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में आता है। यहां पर समय-समय पर आपदा प्रबंधन की ओर से स्कूल, कॉलेज सहित विभिन्न संस्थानों में मॉकड्रिल का आयोजन किया जाता है।

आपदा आने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है, लेकिन किसी भी संस्थान, शहर में आपदा आने पर कहां जाना है, ऐसे सुरक्षित स्थान चिह्नित ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि आपदा आने से पहले सभी को सुरक्षित स्थानों की जानकारी होना जरूरी है। इस मौके पर उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार, डीसी राणा, सीयू के प्रो वाइस चांसलर एचआर शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रतिनिधि और देश के कई आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ मौजूद रहे।  

पहले घर में बनाएं आपदा प्रबंधन का प्लान : कमल  

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने कहा कि सबसे पहले हमें अपने घर में आपदा प्रबंधन प्लान बनाने की जरूरत है। लोग भूकंप से बचने के लिए अपने घर की कोई योजना नहीं बनाते। हमें तय करना चाहिए कि जिला स्तर के आपदा प्रबंधन केंद्र को एक मॉडल के रूप में विकसित करें।

भूकंप रोधी बनाएंगे सीयू के सभी भवन : कुलपति 
कार्यशाला में सीयू के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय, अस्पताल, स्कूल आदि के सभी भवन भूकंप रोधी हों।


1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गईं थी जानें
कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।

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