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इस तारीख को दस्तक देगा मानसून, जानिए कहां कम और कहां होगी ज्यादा बारिश

Mansoon
भारतीय मौसम विभाग से उलट प्राइवेट सेक्टर की कंपनी स्काईमेट वेदर सर्विसेज का कहना है कि इस साल मानसून सामान्य से कम रहेगा। स्काईमेट के पूर्वानुमानों के मुताबिक, इस साल मानसून पर अलनीनो का असर पड़ सकता है। इस साल मानसून सामान्य का 93 फीसदी रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जून को केरल पहुंच सकता है। इससे पहले 22 मई को मानसून अंडमान निकोबार पहुंचेगा। मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक इस बार मॉनसून दो दिन की देरी से आ सकता है। एजेंसी ने मानसून के 4 जून को केरल पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया है। आमतौर पर केरल में मानसून शुरू होने की तारीख 1 जून रहती है।

बता दें कि इससे पहले भारत मौसम विभाग (IMD) ने कहा था कि अल नीनो की स्थिति कमजोर बनी हुई है। इसके आगे बढ़ने की संभावना बहुत कम नज़र आ रही है। अगले कुछ महीनों में ये और कमजोर हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो देश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि मानसूनी बारिश का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

कहां होगी ज्यादा कहां होगी कम बारिश- 
स्काईमेट के मुताबिक, इस साल बंगाल, बिहार, झारखंड में बारिश कम होगी।
पूर्वी भारत में सामान्य सामान्य के मुकाबले 92 फीसदी बारिश होने का अनुमान है।
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में अच्छी बारिश के अनुमान जताए जा रहे हैं। मध्यभारत में मॉनसून सामान्य से 50 फीसदी कम रह सकता है।

अर्थव्यवस्था पर मानसून का असर: मानसून का सीधा असर ग्रामीण आबादी पर पड़ता है। मानसून सामान्य और अच्छा रहने से ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय बढ़ती है, जिससे मांग में भी तेजी आती है। ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ने से इंडस्ट्री को भी फायदा मिलता है। वहीं, कमजोर रहने पर इसका उलटा असर होता है।

1951-2000 की बात करें तो देश में बारिश का लॉन्ग पीरियड एवरेज 89cm रहा है। इससे पहले मौसम के बारे में जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट का अनुमान दिया है कि जून से सितंबर के दौरान सीजन में सामान्य की 93 फीसदी बारिश होगी। हालांकि एजेंसियां यह मानकर चलती हैं कि इसमें थोड़ा बहुत बदलाव आ सकता है। 5 फीसदी ज्यादा या कम हो सकता है।

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