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क्या हार के साथ ही चेन्नई को अलविदा कह गए कप्तान धोनी? फाइनल के बाद खुद किया खुलासा


दरअसल, चेन्नई की टीम 150 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी। एक वक्त उसकी स्थिति मजबूत थी, 9 ओवर में ही स्कोर 70/1 हो चुका था। जीत के लिए 11 ओवर्स में 80 रन की दरकार थी। यह लक्ष्य आसान नजर आ रहा था,  लेकिन मैच में वापसी करते हुए मुंबई के गेंदबाजों ने चेन्नई को लगातार झटके दिए।

10वें ओवर में सुरेश रैना (8) और अगले ही ओवर में अंबाती रायुडू (1) भी चलते बने। यहां से चेन्नई पर दबाव बढ़ने लगा। फिर एमएस धोनी बल्लेबाजी करने आए। स्कोर 73/3 हो चुका था। नाजुक मौके पर पूरी टीम की जिम्मेदारी एक बार फिर एमएस धोनी के कंधों पर आ गई।

13वां ओवर हार्दिक पांड्या लेकर आए। चौथी गेंद पर शेन वॉटसन ने शॉर्ट स्क्वायर लेग की दिशा में शॉट खेला और रन लेने दौड़ पड़े। लसिथ मलिंगा ने गलत थ्रो किया। धोनी ने ओवरथ्रो पर रन लेने की ठानी। यही धोनी गलती कर बैठे, क्योंकि इशान किशन ने सटीक थ्रो जमाकर धोनी को संकट में ला दिया था।

मुंबई ने रनआउट की जोरदार अपील की। मैदानी अंपायर ने तीसरे अंपायर को फैसला रेफर कर दिया। टीवी अंपायर ने अनगिनत कैमरा एंग्लस से रीप्ले देखा। मगर किसी भी कोण से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। अब सभी की नजरें मैदान पर लगी बड़ी स्क्रीन पर टिकीं थीं, जहां तय होना था मैच में धोनी का भविष्य।

क्रिकेट को करीब से देखने वाले जानते हैं कि दुविधा की स्थिति में फायदा बल्लेबाज को मिलता है। अधिकतक मौकों पर ऐसा हुआ भी, लेकिन धोनी के मामले में ऐसा नहीं हुआ। कई रीप्ले देखने के बाद तीसरे अंपायर ने धोनी को रनआउट करार दे दिया। 

तीसरे अंपायर नाइजल लॉन्ग के इस फैसले से पूरी दुनिया हैरान रह गई। 8 गेंदों में 2 रन बनाने के बाद धोनी जब आउट हुए तो चेन्नई को जीत के लिए 44 गेंदों में 69 रन की दरकार थी। इस विकेट का खामियाजा चेन्नई को खिताब चूककर भुगतना पड़ा।

मुंबई ने सांस थाम देने वाले मैच की आखिरी गेंद पर चेन्नई को एक रन से हराया। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट एक्सपर्ट्स तक कई लोगों का मानना है कि धोनी आउट नहीं थे। खैर दोनों ही टीम ने अपना शतप्रतिशत दिया। जाते-जाते IPL 'इंडियन पैसा वसूल लीग' बन गया।

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