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आज ऐसे करें कृष्ण भगवान की पूजा, इन मंत्रों का करें जाप


जन्माष्टमी हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है। कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा और उपवास रखने वाले भक्तों को जीवन में आनंद की प्राप्ति होती है। संतान सुख से वंचित भक्तों को इस दिन भगवान की आरधना करने से संतान सुख का योग बनता है। जन्माष्टमी  के दिन बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाएं क्योंकि माखन-मिश्री उन्हें विशेष प्रिय है। जन्माष्टमी पर भोग लगाते समय तुलसी अवश्य रखें। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। जन्माष्टमी के दिन किसी गौशाला में धन का या हरी घास का दान करें। भगवान श्रीकृष्ण  को गौमाता बहुत प्रिय हैं। जो भक्त गौसेवा करते हैं, श्रीकृष्ण की कृपा मिल सकती है।


पूजा विधि : भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि की रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था जिसके कारण यह व्रत सुबह से ही शुरू हो जाता है। दिनभर भगवान हरि की पूजा मंत्रों से करके रोहिणी नक्षत्र के अंत में पारण करें। अर्द्ध रात्रि में जब आज श्रीकृष्ण की पूजा करें। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कामों ने निवृत्त होकर स्नान करें। स्नान करते वक्त इस मंत्र का ध्यान करें-

“ऊं यज्ञाय योगपतये योगेश्रराय योग सम्भावय गोविंदाय नमो नम:”


इसके बाद श्रीहरि की पूजा इस मंत्र के साथ करनी चाहिए – “ऊं यज्ञाय यज्ञेराय यज्ञपतये यज्ञ सम्भवाय गोविंददाय नमों नम:”

अब श्रीकृष्ण के पालने में विराजमान करा कर इस मंत्र के साथ सुलाना चाहिए- “विश्राय विश्रेक्षाय विश्रपले विश्र सम्भावाय गोविंदाय नमों नम:”

जब आप श्रीहरि को शयन करा चुके हो इसके बाद एक पूजा का चौक और मंडप बनाए और श्रीकृष्ण के साथ रोहिणी और चंद्रमा की भी पूजा करें। उसके बाद शंख में चंदन युक्त जल लेकर अपने घुटनों के बल बैठकर चंद्रमा का अर्द्ध इस मंत्र के साथ करें।

श्री रोदार्णवसम्भुत अनिनेत्रसमुद्धव।
ग्रहाणार्ध्य शशाळेश रोहिणा सहिते मम्।।

इस तरह भगवान की पूजा के बाद घी-धूप से उनकी आरती करते हुए जयकारा लगाना चाहिए और प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत खोल लें।

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