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हिमाचल में मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट हुए मजदूर-किसान, जगह-जगह किए प्रदर्शन


सीटू व अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय आह्वान पर 44 श्रम कानूनों को खत्म करके 4 प्रस्तावित श्रम संहिताओं के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के शिमला, रामपुर, रोहड़ू, सोलन, परवाणु, नाहन, किन्नौर के टापरी, मंडी, धर्मपुर, सरकाघाट, कुल्लू, चम्बा, होली बजोली, धर्मशाला, हमीरपुर व ऊना सहित 25 जगहों पर जबरदस्त प्रदर्शन किए गए। इसी कड़ी में शिमला के डीसी ऑफिस के बाहर मजदूर संगठन सीटू व हिमाचल किसान सभा द्वारा संयुक्त रूप से प्रदर्शन करते हुए केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। धरना-प्रदर्शन के दौरान किसान सभा ने राष्ट्रपति से मजदूरों के पक्ष के श्रम कानूनों को तुरंत बहाल करने की मांग की।

पूंजीपतियों व उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है मोदी सरकार

प्रदर्शन के दौरान सीटू व हिमाचल किसान सभा के नेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आने के बाद जल्दबाजी में श्रम कानूनों को खत्म करने की साजिश रच रही है। इस जल्दबाजी के पीछे उसकी मंशा पूंजीपतियों व उद्योगपतियों को भारी फायदा पहुंचाना है। इस सरकार ने 1923 से लेकर आज तक बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके केवल 4 श्रम संहिताओं में तबदील करने की शुरूआत वर्तमान संसद सत्र से कर दी है। इनमें से केंद्र सरकार द्वारा 4 श्रम कानूनों को खत्म करके वेतन संहिता अधिनियम 2019 तथा 13 श्रम कानूनों को खत्म करके व्यावसायिक स्वास्थ्य, सुरक्षा व कामकाजी स्थिति संहिता विधेयक 2019 सहित 2 श्रम संहिताओं को लोकसभा में पारित कर दिया है।

17 तरह के विभिन्न कानून पूरी तरह से हो जाएंगे खत्म

इन दोनों संहिताओं के अस्तित्व में आने से वेतन भुगतान, न्यूनतम वेतन, बोनस, समान वेतन, कारखाना उद्योग विधेयक, खान-खदान, जहाज, गोदाम, कर्मचारी, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कानून, प्लांटेशन लेबर, ठेका मजदूर, प्रवासी मजदूर अधिनियम, कामकाजी पत्रकार व अन्य समाचार पत्र कर्मचारी, परिवहन कर्मी, सेल्ज प्रमोशन कर्मचारी, बीड़ी व सिगार वर्कर्ज, चलचित्र कर्मचारी व सिनेमा-थिएटर कर्मचारी आदि तबकों के 17 तरह के विभिन्न कानून पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। यह मजदूरों पर केंद्र सरकार का सुनियोजित हमला है, जिसे वह पूंजीपतियों के साथ मिलकर बोल रही है। इससे असंगठित क्षेत्र के 90 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों व सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाएंगे। देश का मजदूर वर्ग इस हमले को कतई स्वीकार नहीं करेगा व इसका करार जबाव देगा।

किसानों पर भी तेज हुए हमले


मजदूरों की तर्ज पर ही केंद्र सरकार द्वारा किसानों पर भी हमले तेज हुए हैं। वर्तमान केंद्र सरकार लागत के डेढ़ गुना की राशि किसानों को देने की स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को जानबूझकर लागू नहीं कर रही है। किसानों पर बढ़ते कर्ज के कारण उनकी आत्महत्याओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों को उनकी उपज की पैदावार का मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण किसान या तो आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं या फिर उन्हें अपनी सब्जियों व फसलों को सड़कों पर फैंकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में मजदूरों व किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। इसी क्रम में देश भर में मजदूरों व किसानों द्वारा धरने-प्रदर्शनों का आयोजन किया गया।

प्रदर्शन में ये रहे मौजूद

प्रदर्शन में सीटू राज्य अध्यक्ष जगत राम, राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा, हिमाचल किसान सभा राज्य अध्यक्ष कुलदीप तनवर, जिला अध्यक्ष सत्यवान पुंडीर, रमाकांत मिश्रा, हिमी देवी, किशोरी ढटवालिया, विनोद बिरसांटा, बालक राम, सुरेश, दिलीप, रामप्रकाश, विरेन्द्र लाल, राकेश कुमार, नोख राम, पवन शर्मा, पूर्ण चन्द, मदन, सुरेंद्र बिट्टू, सुरेश, राजू, अनूप, अनिल पंवर, सतपाल बिरसांटा, रोहित व सुरजीत सहित अन्यों मजदूरों व किसानों ने भाग लिया।

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