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OMG! मंडी के नामी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, मरते-मरते बचा मरीज


मंडी जिला के एक नामी अस्पताल पर इलाज के दौरान लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं। मरीज पूजा रानी के पति भूपेंद्र पाल ने जिला मंडी के चक्कर स्थित अस्पताल के डॉक्टरों पर उनकी पत्नी का लापरवाही से इलाज कर नसें काटने के आरोप लगाए हैं। भूपेंद्र पाल ने कहा कि 8 जुलाई को वह अपनी पत्नी के गाल ब्लेडर में पथरी का ऑपरेशन करवाने अस्पताल गए और अस्पताल में मौजूद डा. वंदना जग्गी चंदेल ने उन्हें कुछ टेस्ट करवाने को कहा। इस पर उनके द्वारा मरीज के सारे टेस्ट करवाने के बाद उन्होंने रिपोर्ट डा. अरूण चंदेल के पास चेक करवाई। 

उन्होंने कहा कि टेस्ट रिपोर्ट चेक करने के बाद डा. अरूण चंदेल ने सब कुछ सामान्य होने के बारे में कहा गया। इस पर 12 जुलाई को उनकी पत्नी के आपरेशन की डेट तय कर दी गई। उन्होंने कहा कि 12 जुलाई को उनकी पत्नी को आपरेशन के लिए अस्पताल में एडमिट कर दिया गया और उस दिन 4 मरीजों के ऑपरेशन किए गए।

आपरेशन के बाद भी हालात रहे खराब, टांकों से शुरू हुआ फ्लयूड का रिसाव

भूपेंद्र ने कहा कि आपरेशन करवाने वाले अन्य दो मरीज दूसरे ही दिन अपने घर वापिस लौट गए लेकिन उनकी पत्नी तीन दिन बीत जाने के बाद भी उठ नहीं पा रही थी। उन्होंने कहा कि तीन दिन तक उनकी पत्नी हालत ठीक नहीं होने पर भी अस्पताल द्वारा डिस्चार्ज देने पर वह अपनी पत्नी को उसके मायके सरकाघाट के लोअर भांबला लेकर आ गए। उन्होंने कहा कि दो दिन उपरांत वह पत्नी को लेकर जाहू स्थित अस्पताल में टांके खुलवाने के लिए लेकर गए, लेकिन उस समय टांके वाले स्थान से पीले रंग के फ्लूइड का रिसाव शुरू हो गया। इस पर जब भूपेंद्र ने डा. अरूण चंदेल को फोन किया तो उन्होंने उनकी पत्नी को अस्पताल में एडमिट होने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जाहू में उनके मरीज को किसी डॉक्टर ने अटेंड नहीं किया और डा. अरूण चंदेल मात्र फोन पर ही दिशानिर्देश देते रहे। इसी दौरान उनकी पत्नी के टांकों से पूरी रात फ्लूइड का रिसाव होता रहा।
गलत तरीके से डाल दी पेट में पाइप, मरीज की हालत हुई नाजुक

पीड़ित महिला के पति भूपेंद्र ने कहा कि 20 जुलाई को वह दोबारा अपनी पत्नी को चेक करवाने अस्पताल ले गए। जहां डा. गौतम ने उनकी पत्नी के पेट में पाइप डाली, जो उन्हें बाद में पता चला की गलत तरीके से डाली गई है। इस परिजनों द्वारा बार-बार फ्लूइड निकलने को लेकर डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कुछ पेशेंट में ऐसा हो जाने के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि इसके उपरांत उनके मरीज को बुखार आना भी शुरू हो गया और बार-बार बुखार बढ़ने पर डॉक्टर उन्हें दवाई की हैवी डोज देने लगे। लेकिन जैसे ही दवाई का असर खत्म हो जाता था तो बुखार दोबारा आ जाता था। इस पर परेशान होकर परिजनों ने डा. चंदेल व डा. वंदना को मरीज की हालत में सुधार नहीं होने पर आईजीएमसी शिमला या पीजीआई चंडीगढ़ ले जाने के लिए कहा। लेकिन इस पर अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें साफ उत्तर नहीं दिया गया। भूपेंद्र ने कहा कि मरीज का बुखार थमने का नाम नहीं ले रहा था तो डॉक्टर ने उनका एमआरसीपी करवाया गया। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को उनकी पत्नी के टांकों से निकलने वाले फ्लूइड की मात्रा कम हो गई और उसी दिन उनके पेट से पाइप को निकाल दिया गया।

मरीज मरने की कगार पर, डॉक्टर उतरे बदसलूकी पर

भूपेंद्र ने कहा कि 24 जुलाई को डा. अरूण चंदेल, डा.वंदना जग्गी चंदेल व डा. गौतम ने उनकी पत्नी को आपरेशन थिएटर बुलाकर खरी-खोटी सुनाई गई और बदतमीजी की भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को फिर से बुखार आने पर डॉक्टरों को मरीज को किसी बड़े अस्पताल रेफर करने के लिए कहा गया। इस पर अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने मरीज की बिगड़ी हुई हालत में ही डिस्चार्ज कर दिया गया।
14 दिन PGI चंडीगढ़ में उपचाराधीन रहने के बाद बची जान

मरीज की बिगड़ती हुई हालत को देखते हुए वह उन्हें इलाज के लिए 26 जुलाई की रात को पीजीआई चंडीगढ़ ले गए और 27 जुलाई को पीजीआई चंडीगढ़ की इमरजेंसी में दाखिल करवाया गया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी 27 जुलाई से 8 अगस्त तक उनकी पत्नी पीजीआई चंडीगढ़ में दाखिल रही। उन्होंने कहा कि अस्पताल चक्कर के डॉक्टरों के द्वारा आपरेशन के समय दो नसों को काट देने के कारण उनकी पत्नी को पीजीआई चंडीगढ़ में दो स्टंट पड़े। पीड़ित परिवार ने केंद्र व प्रदेश सरकार से इस प्रकार से लापरवाही कर मरीज की जान को जोखिम में डालने पर अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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