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भटियात की सबसे ऊंची पहाड़ी की चोटी पर विराजमान है नाग सुन्डल का मंदिर, जहा आने से पूरी होती है हर मनोकामना


जय सुन्डल नाग राज! प्राकृतिक सुन्दरता विकास खण्ड़ भटियात की सबसे ऊपरी पहाडी चोटी पर देवदार के घने जंगलों के वीच समुद्रतल से 1400 फुट की ऊंचाई पर स्थित है नाग सुन्डल का मंदिर ! यहां से चारों ओर का सुन्दर नजारा पीर पंजाल, जास्कर, धौलादार, शिवालिक दिखाई देता है!

प्राकृतिक द्वष्टि से वडी खुवसुरत जगह है ही परन्तु धार्मिक द्वष्टि से भी इसका वहुत महत्व हैं. नाग सुन्डल का मंदिर हरियाली और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है मंदिर के रास्ते में प्राकृतिक भव्यता और आमने सामने पहाड़ की चोटियां मन को रोमाचित करती है !

रोचक कथा: पहाडी के ऊपर देवदार के घने वृक्षों के वीच वना प्रकृति की नैसर्गिक सुंन्दरता व रोचक कथा के लिए काफी प्रसिद है माना जाता है कि पांच नाग भाईयों नाग सुन्डल, नाग मंढौर, नाग विन्तरू, नाग कालिया, नाग टौणू और का उनकी वहन शीतला माता का एक परिवार था जिसमें नाग सुण्डल सबसे वडें थे और नाग सुन्डल ने अपनी प्यास वुझाने के लिए छोटे भाईयों को पानी लाने के लिए भेजा उनमें से एक को मंढौर नामक स्थान पर पानी मिला और वह यही वस गए दूसरे को विन्तरू नाले में पानी मिला और वह वहां वस गए और वैसे ही वाकि भी पानी वाली जगहों पर वसते गए वहन शितला को भी पानी लाने को भेजा तो उन्होने भी रावी नदी के किनारे अपनी प्यास को वुझाया और ऊधर ही वस गई इन्तजार करते करते काफी समय हो गया और कोई भी वापिस नही आया और सुंन्डल नाग अकेले ही सुन्डल पहाडी पर रह गए और उन्होने भी सुन्डल पहाडी से १०० मी. की दूरी पर खुद ही पानी निकाला और अपनी प्यास को वुझाया ! आज भी उस पानी को सुंन्डल नाग पानी के नाम से जाना जाता है!

आस्था का प्रतीक है नाग सुन्डल: भटियात के दूर दूर से व पांच पंचायतों ग्राम पंचायत काहरी, अवांह,गाहर, वनेट , मलुन्डा इत्यादि के लोग अपनी फसलों मक्की, जौ,गेंहू धान को काटने व वीजने से पहले एक जातर देते है क्योंकि फसल काटना और वीजना व (वतर) के लिए नाग सुन्डल के ऊपर निर्भर है!

नाग सुन्डल के मंदिर मंदिर कैसे पहूंचे :- यह मंदिर चम्बा जिले के चुवाडी-जोत-चम्बा मार्ग के वनुनी से २ कि.मी. पैदल की दूरी पर सुन्डल की पहाडी पर स्थित है!

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