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एक ही रात में बनकर तैयार हो गए थे ये मंदिर, निर्माण के पीछे की कहानी है हैरान करने वाली


आज हमारे देश में कई ऐसे चमत्कारिक मंदिर है, जिनके बारे में तरह-तरह की मान्यताएं हैं. बहुत से मंदिर तो सैकड़ों साल पुराने हैं. हर मंदिर के पीछे की एक कहानी है. कुछ मंदिर ऐसे हैं, जिनका निर्माण केवल एक रात में हुआ और इनके निर्माण के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है.

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में गोविंद जी का मंदिर है, जो देखने में ऐसा लगता है कि अभी भी अधूरा है. ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर एक रात में बनकर तैयार हो गया था. इस मंदिर को भूतों या दिव्य शक्तियों ने मिलकर एक रात में ही बना दिया था. यह भी कहा जाता है कि सुबह होने से पहले ही किसी ने चक्की चलानी शुरू कर दी थी, जिसकी आवाज आने के बाद मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो पाया.

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में हथिया देवाल नाम का शिव जी का एक मंदिर है, जिसके बारे में यह मानता है कि एक हाथ वाले शिल्पकार ने इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में कर दिया था. हालांकि रात होने और जल्दी बनाने के चक्कर में यहां शिवलिंग का अरघा विपरीत दिशा में बना दिया गया था. इसी वजह से इस मंदिर की शिवलिंग की पूजा की जाती है.

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से लगभग 20 किलोमीटर दूर ककनमठ नाम का एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसका निर्माण कछवाहा वंश के राजा कीर्ति सिंह के शासनकाल के दौरान हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर एक रात में बनकर तैयार हो गया था. यह भी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भोलेनाथ के गण यानी भूतों ने किया था. यह मंदिर पूरी तरह से पत्थरों से बना हुआ है और इन पत्थरों को इस तरीके से रखा गया है जिनके बीच संतुलन बना हुआ है. यह पत्थर आंधी तूफान आने पर ही नहीं हिलते हैं.

भोपाल से 32 किलोमीटर दूर भोजपुर में पहाड़ी पर स्थित भोजेश्वर मंदिर स्थित है. इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था. हालांकि यह मंदिर पूरा नहीं बन पाया. इसके निर्माण को अधूरा क्यों छोड़ दिया गया, इससे जुड़ी कई कहानियां हैं. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में होना था, लेकिन छत का काम पूरा होने से पहले ही सुबह हो गई और इस मंदिर का निर्माण कार्य अधूरा रह गया. इस मंदिर में जो विशाल शिवलिंग है, उसका निर्माण एक ही पत्थर से हुआ है.

झारखंड के देवघर में स्थित शिव मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध है. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में ही कर दिया था. इस मंदिर के प्रांगण में माता पार्वती का मंदिर है, जिसके बारे में मान्यता है कि निर्माण कार्य होते होते सुबह हो गई, जिसकी वजह से मंदिर अधूरा रह गया.

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