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Wow! बेटे ने तो कर दिया मना..बेटी ने लीवर दान करके बचाई पिता की जान


बेटिया हमेशा ही कुछ अलग ही कर समाज में एक संदेश छोड़ जाती है और बेटियो ने हमेशा ही साबित किया है जब अपनों पर संकट आता है तो यह बेटियां ही अपनी जान की परवाह न कर के हमेशा अपनों के लिए खड़ी रहती है।

मिर्ज़ापुर की ऐसी ही एक बेटी ने सभी का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया, खुद की जान की परवाह न करके कुछ समय पहले एक बेटी ने अपना लीवर अपने पिता को दे कर जान बचाई। बेटी की शादी हो चुकी है उसके भी दो छोटे-छोटे बच्चे है मगर एक बेटी ने साबित किया आखिर क्यों एक पिता और बेटी का रिश्ता भगवान का सबसे अनमोल धरोहर है ।

एक बेटी का अपने पिता को जीवनदान देने की कहानी रोचक है। मिर्ज़ापुर के जमालपुर थाना क्षेत्र के बहुआर गांव के रहने वाले रवि प्रकाश त्रिपाठी की हालत पिछले कुछ महीनों से ज्यादा ख़राब हो गयी तो घर वालो ने रवि प्रकाश त्रिपाठी को वाराणसी में स्थित हेरिटेज अस्पताल में भर्ती कराया कई दिन दवा चलने के बाद जब कोई राहत नहीं मिली तो डॉक्टरों ने लीवर का परिक्षण किया तो लीवर में रिसाव था जिसे देखते हुए डॉक्टर ने लीवर के ट्रांसप्लांट के लिए परिजनों को मेदांता गुड़गांव या फिर एम्स में ले जाने की सलाह दी ।

परिजन रवि प्रकाश त्रिपाठी को लेकर मेदांता अस्पताल पहुचे तो डॉक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट के लिए कहा इसके लिए किसी डोनर की जरुरत थी जो लीवर ट्रांसप्लांट कर सके। असली समस्या यही से शुरू हो गई रवि प्रकाश त्रिपाठी के कुल 6 बच्चे थे दो लड़के अरूण और वरुण साथ ही चार बेटियां वीणा, ब्यूटी, बुलबुल और बानो। लीवर डोनेट को लेकर कोई सामने नहीं आ रहा था, लिहाजा डॉक्टरों ने गंभीर रूप से बीमार मरीज को घर ले जाने की सलाह दी।

लीवर ट्रांसप्लांट की अवस्था में रवि प्रकाश त्रिपाठी का बचना मुश्किल था। जैसे ही वीणा को पता चला पिता की जान बचनी मुश्किल है तो बेटी अपने ससुराल कंचनपुर से अपने ससुर श्री निति उपाध्याय के साथ मेदांता अस्पताल गुड़गांव पहुंच गई। पिता की जान बचाने के लिए खुद अपना लीवर ट्रांसप्लांट करवाने का फैसला लिया । हालांकि इस फैसले में वीणा के पति मनीष उपाध्याय और ससुर निति उपाध्याय का भी समर्थन था ।

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