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हिमाचल: यहां मिला 551 लाख साल पुराना जीवाश्म, वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसे किया खुलासा


हिमाचल के सिरमौर जिले के रजाणा गांव में 551 वर्ष पुराना जीवाश्म मिला है। अंतरराष्ट्रीय भू-गर्भ कांग्रेस (आईजीसी) के तत्वावधान में शोध करने पहुंचे पंजाब विश्वविद्यालय के भू-गर्भ वैज्ञानिकों की टीम ने यह खुलासा किया है। आईसीपीएमएफ इंडक्शन कपल प्लाजमा इसेक्टो मीटर नामक मशीन से वैज्ञानिकों को इसकी उम्र का पता चला है। अब लाखों साल पुराना यह जीवाश्म जांच के लिए केंद्रीय खनन मंत्रालय की प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।

पंजाब विवि चंडीगढ़ के भू-वैज्ञानिक बीपी सिंह के नेतृत्व में भू-विज्ञान की चार छात्राओं की टीम इन दिनों रेणुका क्षेत्र के कुछ गांवों का भ्रमण कर दुर्लभ पत्थरों व जीवाश्म की खोज कर रही है।

जो लाखों वर्ष पूर्व समुद्र में पाए जाते थे ये दुर्लभ पत्थर: उन्हें रजाणा गांव से 551 लाख वर्ष पुराना संसालीथिस नामक एक जीवाश्म मिला। इसके अतिरिक्त खुड द्राविल गांव से 512 लाख वर्ष पूर्व पुराने ट्रलोबाई कीडे़ को भी इस टीम ने खोज निकाला। भू-वैज्ञानिक डा. बीपी सिंह ने बताया कि रेणुका क्षेत्र के खुड व रजाणा गांव में वे दुर्लभ पत्थर हैं जो लाखों वर्ष पूर्व समुद्र में पाए जाते थे।

जिन पर जीवाश्म (कीड़े) के निशान आज भी हैं। इन्हें अन्य पांच प्रजातियों के पत्थर भी मिले हैं, जिनमें सैल, शिल्ट स्टोन, सैंड स्टोन, लाइम स्टोन व डोनामाइट शामिल हैं। पूरे भारत में सबसे अधिक पुराने व दुर्लभ पत्थर इसी क्षेत्र में दिखाई दिए हैं। टीम में बीपी सिंह के अतिरिक्त एमएससी की छात्रा निवेदिता डडवाल, मेघना, स्नेहा, संगीता शामिल रहीं।

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