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हिमाचल: हुनर की कमी नहीं लेकिन फिर भी इस स्कूल में आने से कतराते हैं शिक्षक


इसे महज छात्रों से खिलवाड़ ही कहा जाएगा कि स्कूल में उन्हें हर विषय की व्यवस्थित तालीम नहीं दी जा रही है। कहने को तो सैंज घाटी का दियोहरी स्कूल को वरिष्ठ माध्यमिक का दर्जा है लेकिन यहां शिक्षकों का टोटा है। हैरत की बात तो यह है कि इस विद्यालय में शिक्षकों के आदेश तो होते हैं लेकिन वे यहां पर सेवाएं देने से हाय-तौबा करते हैं और जुगाड़ की सियासत से दूसरे स्टेशनों की ओर रुख मोड़ लेते हैं। स्कूल पर सियासत हावी होती जा रही है। कुछ माह पूर्व ही स्कूल के लिए पीजीटी इतिहास के प्रवक्ता के आदेश तो हुए थे लेकिन उन्होंने भी दूसरे स्कूल के लिए जुगाड़बाजी कर दी। वहीं, हाल ही में कार्यालय कनिष्ठ सहायक के आदेश भी हुए थे लेकिन उन्होंने भी जुगाडबाजी से दूसरे स्कूल में तैनाती दे दी। छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि जब कोई भी इस स्कूल में आने को तैयार नहीं है तो फिर सरकार ने ऐसे स्कूल खोले ही क्यों है? फिर सरकार इस स्कूल के लिए शिक्षकों के ऑर्डर भी क्यों करती है?

अभिभावकों ने बताया कि जब इस स्कूल के लिए शिक्षकों व गैर शिक्षकों के विभागीय आदेश होते हैं तो जनता प्रसन्न होती है लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें मायूसी मिलती है। क्योंकि वह अपने आदेश दूसरे स्थान के लिए करते हैं। इससे जनता में खासा रोष व्याप्त है। इस विद्यालय में दुशाहड़, बनोगी व सुचैहण पंचायत के छात्र पढ़ने आते हैं। कई दुर्गम स्थानों देवगढ़, कौंशा, दुशाहड़, अप्पर नही, जिली नही, विजल, कथयाउगी, करटाह, भुरठ व शुकारी से छात्र डेढ़ घंटे का सफर तय करने यहां पढ़ने आते हैं।

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