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कांगड़ा: माँ बगलामुखी मंदिर जहां पूरी होती है हर मनोकामना, माँ अपने भक्तों को देती है मुंह मांगा वरदान

baglamukhi temple kangra

भारत में माँ बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा जिला शाजापुर (मध्यप्रदेश) तीनों का अपना अलग-अलग महत्व है। बगलमुखी शब्द बगल और मुख से आया है जिनका मतलब क्रमशः लगाम और चेहरा है। इस प्रकार, व्युत्पत्तिशास्त्र द्वारा इस नाम का अर्थ है ‘एक चेहरा जो शासन की शक्ति है’। माँ बगलामुखी का मंदिर ज्वालामुखी से 22 किलोमीटर दूर ‘वनखंडी’ नामक स्थान पर स्थित है। मंदिर का नाम ‘श्री 1008 बगलामुखी वनखंडी मंदिर’ है।

बगलमुखी मंदिर कांगड़ा जिले के एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। कई भक्त यहाँ हर रोज हिंदू देवी बगलमुखी की पूजा करने आते हैं, जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं में दस बुद्धि की देवी में एक माना जाता है। बगलामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जनपद के बनखंडी क़स्बा में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र है। बगुलामुखी का यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। 

पांडुलिपियों में माँ के जिस स्वरूप का वर्णन है, माँ उसी स्वरूप में यहाँ विराजमान हैं। ये पीतवर्ण के वस्त्र, पीत आभूषण तथा पीले रंग के पुष्पों की ही माला धारण करती हैं। ‘बगलामुखी जयंती’ पर यहाँ मेले का आयोजन भी किया जाता है। ‘बगलामुखी जयंती’ पर हर वर्ष हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त देश के विभिन्न राज्यों से लोग आकर अपने कष्टों के निवारण के लिए हवन, पूजा-पाठ करवाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

बगलामुखी मंदिर का इतिहास: यह माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान एक ही रात में की गई थी, जिसमें सर्वप्रथम अर्जुन एवं भीम द्वारा युद्ध में शक्ति प्राप्त करने तथा माता बगलामुखी की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा की गई थी। कालांतर से ही यह मंदिर लोगों की आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। वर्ष भर असंख्य श्रद्धालु, जो ज्वालामुखी, चिंतापूर्णी, नगरकोट इत्यादि के दर्शन के लिए आते हैं, वे सभी इस मंदिर में आकर माता का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर के साथ प्राचीन शिवालय में आदमकद शिवलिंग स्थापित है, जहाँ लोग माता के दर्शन के उपरांत शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं।

बगलामुखी जयंती पर मंदिर में हवन करवाने का विशेष महत्व है, जिससे कष्टों का निवारण होने के साथ-साथ शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है। द्रोणाचार्य, रावण, मेघनाद इत्यादि सभी महायोद्धाओं द्वारा माता बगलामुखी की आराधना करके अनेक युद्ध लड़े गए। नगरकोट के महाराजा संसार चंद कटोच भी प्राय: इस मंदिर में आकर माता बगलामुखी की आराधना किया करते थे, जिनके आशीर्वाद से उन्होंने कई युद्धों में विजय पाई थी। 

तभी से इस मंदिर में अपने कष्टों के निवारण के लिए श्रद्धालुओं का निरंतर आना आरंभ हुआ और श्रद्धालु नवग्रह शांति, ऋद्धि-सिद्धि प्राप्ति सर्व कष्टों के निवारण के लिए मंदिर में हवन-पाठ करवाते हैं।लोगों का अटूट विश्वास है कि माता अपने दरबार से किसी को निराश नहीं भेजती हैं। केवल सच्ची श्रद्धा एवं सद्विचार की आवश्यकता है।

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