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बोर्ड परीक्षा में विज्ञान में मिले 43 नंबर, जब कॉपी मंगवाई तो खुशी के साथ हुआ गम


माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणाम में लापरवाही सामने आई है। जिस तरह की बोर्ड में गलतियां हो रही है उससे साख बिगड़ती ही जा रही है। ताजा मामला फतेहपुर के नगरदास गांव की एक छात्रा से जुड़ा हुआ है।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी माध्यमिक परीक्षा परिणाम में छात्रा के 80 प्रतिशत अंक आए, लेकिन विज्ञान विषय में सिर्फ 43 अंक थे। नतीजा यह रहा है कि सांइस लेने वाली छात्रा को विज्ञान विषय में कम अंक आने पर आटर््स में दाखिला लेना पड़ा। लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज छात्रा ने आरटीआइ से कापी मंगवाई तो बोर्ड के सिस्टम की पोल खुल गई। छात्रा के जिस विज्ञान विषय में बोर्ड ने 43 नंबर दे रखे थे। उसी विषय में कापी में 94 नंबर दिए हुए थे। लेकिन बोर्ड की गलती के कारण छात्रा का पूरा रिकार्ड खराब हो गया।

जानकारी के अनुसार नगरदास की बालाजी सीनियर सैकण्डरी स्कूल में पढऩे वाली छात्रा कविता कुमारी के दसवीं में परिणाम के समय 80.67 प्रतिशत अंक आए। इनमें विज्ञान विषय में सिर्फ 43 अंक थे। जबकि छात्रा के बाकि विषय में 80 से अधिक अंक हैं। कविता पढ़ाई में मेधावी थी, इसलिए विज्ञान संकाय लेना चाहती थी, लेकिन दसवीं कक्षा में 43 अंक होने के कारण सभी लोगों ने दवाब के चलते उसे आटर््स विषय लेना पड़ा। इसलिए कविता ने आरटीआई के माध्यम से अपनी उत्तरपुस्तिका मंगवाई। बोर्ड ने गुरुवार को कापी के साथ परिवर्तित परिणाम भी भेजा तो बोर्ड की गफलत की पोल खुली। उत्तरपुस्तिका में कविता के विज्ञान विषय में 94 नंबर आए हुए थे। एक साथ 51 अंकों की बढ़ोतरी होने पर कुल प्राप्तांक भी 89.16 प्रतिशत हो गए।

बोर्ड की गलती कितने बच्चों को करती होगी मायूस राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा परिणाम में इस तरह की गलफत ना जाने कितने बच्चों को मायूस करती होगी। हर वर्ष इस तरह के कई केस सामने आते हैं। इसके बाद भी बोर्ड की ओर से कोई सुधार नहीं होने के कारण कई विद्यार्थियों की जिदंगी बदल जाती है। कई छात्र व छात्रा परेशान व हताश होकर दूसरे विषय लेते व कई मानसिक तनाव झेलते हैं, हर वर्ष गड़बड़ी होने के बाद भी बोर्ड सुधार नहीं कर पा रहा है।

विज्ञान की जगह कला में लेना पड़ा प्रवेश स्कूल के प्रधानाचार्य दिनेश पारीक ने बताया कि विज्ञान विषय में कम नंबर होने के कारण छात्रा कविता ने कला संकाय में प्रवेश लिया। दसवीं कक्षा के हर विषय में अच्छे नंबर होने के कारण उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि विज्ञान में इतने कम नंबर आ सकते हैं। विज्ञान विषय में कम नंबर होने के कारण परिजनों व शिक्षकों ने कला संकाय लेने के लिए कहा जबकि छात्रा विज्ञान विषय लेना चाहती थी। आरटीआइ के तहत कॉपी मंगवाई तो पूरी हकीकत सामने आ गई।

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