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लॉकडाउन 3.0 : मोदी सरकार ने दो हफ्ते के लिए बढ़ाया लॉकडाउन, 17 मई तक रहेगा जारी


नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच कोरोना संकट से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन को दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। अब देश में 17 मई तक लॉकडाउन जारी रहेगा। गृह मंत्रालय के जरिए इसकी जानकारी दी गई।
पीएम मोदी ने 21 दिन के लॉकडाउन का जो एलान किया था उसकी मियाद खत्म होने को है इसलिए सरकार ने लॉक डाउन की मियाद17 मई तक बढ़ा दी है
सरकार ने बदला जोन का पैमाना
बता दें कि देश में कई जिले रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बंटे हुए हैं। रेड जोन में वो जिले और क्षेत्र हैं जहां कोरोना संक्रमण का मामला सबसे ज्यादा है। ऑरेंज जोन में वो जिले हैं जहां कोरोना के मामले कम हैं और ग्रीन जोन में वो जिले हैं जहां कोरोना का एक भी मामला नहीं है। हालांकि इस बार सरकार ने इस पैमाने को बदल दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मामलों की संख्या, डबलिंग रेट और परीक्षणों के हिसाब से जिलों की नई सूची तैयार की है। इस सूची में बताया गया है कि कौन सा जिला किस जोन में आता हैं और वहां पर किस तरह की सख्ती बरती जाएगी।

केंद्रीय गृह सचिव प्रीति सुडान ने कहा कि सभी राज्यों से अनुरोध है कि वो चिन्हित किए गए रेड और ऑरेंज जोन जिलों में कंटेनमेंट जोन और बफर जोन का परिसीमन करें और उन्हें सूचित किया जाए। किसी भी जिले को ग्रीन जोन में तभी माना जाएगा जब वहां पिछले 21 दिनों से कोरोना के कोई नए मामले ना आए हों। बता दें कि इससे पहले ये समय 28 दिनों का था यानि कि 28 दिनों तक कोरोना के नए मामले ना आने पर उन्हें ग्रीन जोन में रखा जाता था। गौरतलब है कि सूची में 3 मई के बाद से 130 जिलों को रेड, 284 जिलों को ऑरेंज और 319 जिलों को ग्रीन जोन में शामिल कर दिया गया है।
रेड जोन में शामिल हैं ये जिले
बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बैंग्लुरु, अहमदाबाद को अभी भी रेड जोन में ही रखा है। वहीं महाराष्ट्र के 14, दिल्ली के 11, तमिलनाडु के 12, यूपी के 19, बंगाल के 10, गुजरात के 9, एमपी के 9 और राजस्थान के 8 जिले रेड जोन में शामिल किए हैं। इन जिलों में बाकी जिलों की अपेक्षा ज्यादा सख्ती और सावधानी बरती जा रही है।
प्रीति सुडान ने ये भी कहा है कि एक या अधिक नगर निगमों वाले, निगमों और जिले के अन्य क्षेत्रों को अलग-अलग इकाइयों के रुप में माना जा सकता हैं। अगर वो रेड या ऑरेंज जोन में आते हैं, यहां इनमें से एक या अधिक में पिछले 21 दिनों में कोई नया मामला दर्ज नहीं होता है तो उन्हें आंचलिक वर्गीकरण में एक स्तर कम माना जा सकता है।

आगे प्रीति सुडान ने कहा कि बफर जोन में स्वास्थ्य सुविधाओं में आईएलआई/ एसआरआई मामलों की निगरानी के माध्यम से मामलों की व्यापक निगरानी की जानी चाहिए। सभी राज्यों से अनुरोध है कि वो चिन्हित रेड और ऑरेंज जोन जिलों में कंटेनमेंट जोन और बफर जोन का परिसीमन करके उन्हें सूचित करें। इस तरह से सरकार का उद्देश्य पूरी तरह से सभी संक्रमित रेड जोन वाले जिलों को ग्रीन जोन में तब्दील करना है। ऐसा होने पर ही देश के सभी जिले कोरोना रहित माने जाएंगे।

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