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कुमार संगाकारा ने 9 साल बाद खोला राज, विश्व कप फाइनल हारने के बाद ये थी मुस्कराने की वजह


2 अप्रैल 2011 का दिन भारत-श्रीलंका दोनों ही टीमों के लिए बेहद खास था. धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया और कुमार संगकारा की कप्तानी में श्रीलंका क्रिकेट टीम मुंबई के वानखेड़े क्रिकेट स्टेडियम में फाइनल मुकाबला खेलने उतरी थी. जहां भारत ने 6 विकेट से खिताबी जीत दर्ज कर, जश्न मनाना शुरु किया. तो वहीं श्रीलंकाई कप्तान संगकारा की मुस्कुराती हुई छवि ने फैंस का दिल जीत लिया था. मगर अब पूर्व कप्तान ने उस मुस्कान के पीछे छिपा दर्द बयां किया.

श्रीलंका की परिस्थितियों ने हमें धैर्यवान बनाया

श्रीलंका क्रिकेट टीम ने 1996 में अपना पहला व एकमात्र आईसीसी विश्व कप जीता है. इसके बाद टीम 2007 में फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने खिताबी जीत दर्ज कर श्रीलंका को मात दी. इसके बाद 2011 में जब श्रीलंकाई टीम फाइनल में पहुंची तो भारत ने फाइनल में 6 विकेट से हराकर श्रीलंका की सपनों को चूर कर दिया. मगर संगाकारा ने एक चेहरे से तनिक भी दुख जाहिर नहीं होने दिया. अब रविचंद्रन अश्विन के साथ लाइव चैट करते हुए कुमार संगकारा ने कहा,

“मुझे लगता है, मेरे जीवन में, श्रीलंका में रह रहे हैं, बहुत सी चीजें हैं जो आपको सतह से जोड़े रखती हैं. बहुत सारी चीजें हैं जिनके बारे में आप चिंता करते हैं. 30 साल तक हमारे यहां युद्ध हुए, 2005 में प्राकृतिक आपदाएं हुईं.

हमारे पास बहुत सारे अलग-अलग मुद्दे हैं लेकिन श्रीलंका की सबसे बड़ी चीजों में से एक है लचीलापन. ये हममें में जन्मजात है. जब हम खेलते हैं, तो हम जीतना चाहते हैं, हम बेहद प्रतिस्पर्धी हैं.”

मुस्कान ने छिपा दी सारी निराशा

फाइनल मुकाबले में श्रीलंका को हराने के बाद जब एक तरफ टीम इंडिया के खिलाड़ी युवराज सिंह व धोनी जश्न मनाते कैप्चर हुए तभी हारने के बाद श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा के चेहरे पर मुस्कान दिखी. एक सच्चे खिलाड़ी की तरह पूर्व कप्तान ने हार को स्वीकार किया और चेहरे पर कोई तकलीफ नहीं आने दी. अब इंस्टाग्राम पर रविच्रंदन अश्विन के साथ लाइव चैट के दौरान कुमार संगकारा ने खुलासा किया कि,

“हमारे पास यह संतुलन है कि जीत या हार कैसे लिया जाए. मुस्कुराहट निराशा की दुख की एक बड़ी मात्रा को छुपाती है 1996 से श्रीलंका की 20 मिलियन आबादी इसका इंतजार कर रही थी. हमारे पास 2011 में मौका था, 2007 में मौका था, फिर टी20 2009 और 2012 में भी मौका था.”

श्रीलंका ने भारत को दिया था 275 रनों का टार्गेट

श्रीलंका-भारत के बीच खेले गए फाइनल मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 275 रनों का भारीभरकम लक्ष्य खड़ा किया था. फाइनल मुकाबले में महेला जयवर्धने ने 103 रनों की नाबाद पारी खेली थी. इसके अलावा संगकारा 48 रन बनाए.

जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने भले ही शुरुआत में अपने सलामी बल्लेबाजों को खो दिया, मगर गौतम गंभीर 97, धोनी ने 91 रनों की अहम पारियों ने भारत को जीत दिला दी. मैच को भारत ने 6 विकेट से जीता और दूसरा आईसीसी विश्व कप अपने नाम किया.

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