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कौन देगा प्रवासी मजदूरों का ट्रेन का किराया? जानिए भारतीय रेलवे ने क्या दिया जवाब


नई दिल्ली: कोरोना के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। वैसे तो ये 3 मई को खत्म होना था, लेकिन बीमारी के प्रकोप को देखते हुए अब इसकी अवधि बढ़कर 17 मई तक कर दी गई है।.इस बीच, भारतीय रेलवे ने बीते शुक्रवार से देश के विभिन्‍न इलाकों में फंसे प्रवासी कामगारों, छात्रों और पर्यटकों के लिए विशेष ट्रेनों को हरी झंडी दे दी है। देश के चुनिंदा रूट पर ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

जानकारी के अनुसार ट्रेन में सफर करने के लिए किसी को टिकट जारी नहीं किया जा रहा है। मतलब ये कि फंसे हुए लोगों से टिकट के पैसे नहीं लिए जा रहे हैं। इसके अलावा ट्रेन में खाने-पीने के सामान भी फ्री में दिए जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि रेलवे की ओर से किए जा रहे इस खर्च के पैसे कौन देगा?

हालांकि, ये सवाल जब रेलवे के सामने आया तो उन्होंने जवाब में कहा कि किराया संबंधित राज्य सरकारों से लिया जाएगा। रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक किराए में स्लीपर क्लास के टिकट की कीमत, 30 रुपये का सुपरफास्ट शुल्क और प्रति यात्री भोजन के अलावा पानी के लिए 20 रुपये शामिल होंगे। इसका भुगतान राज्य सरकारें करेंगी।

आपको बता दें कि रेलवे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि 1000 से 1200 यात्रियों को ही ट्रेन में बैठने की अनुमति है। रेलवे की ओर से ट्रेनों में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनेटाइजिंग का पूरा ख्याल रखा जाएगा। हालांकि, कौन से लोग ट्रेन से सफर कर सकते हैं, ये राज्य सरकारें तय करेंगी।

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