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रिसर्च में बड़ा खुलासा: अब हवा हो जाऐगा कोरोना!


नई दिल्ली: कोई आपसे पूछे कि पूरी दुनिया में इस वक्त सबसे कीमती चीज क्या हो सकती है हवा हो जाऐगा कोरोना। जवाब बेसाक्ता निकलेगा कोरोना की दवा। जैसे-जैसे कोरोना का चक्रव्यूह दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा है। वैसे-वैसे कोरोना के खिलाफ जारी जंग में भी तेजी आती जा रही है। दुनिया के हर मुल्क में और हर मुल्क के हर सूबे में कोरोना की काट ढूंढने की जद्दोजहद जारी है। अमेरिका में खुद ट्रंप की निगरानी में कोरोना की दवा को लेकर आखिरी राउंड के ट्रायल चल रहे हैं, तो ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड युनिर्वसिटी जैसी बड़ी संस्था ने एस्ट्राजेनका जैसे PHARMA GIANTS से करार कर दवा के निर्माण का काम शुरु कर दिया है, लेकिन नतीजे कब आऐंगे। ये किसी को नहीं पता।

इसी बीच दुनिया के एक बेहद प्रतिष्ठित वैज्ञानिक ने चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक कोरोना को मारने की कोशिशें सफल हो उससे पहले वो खुद अपनी मौत मर जाएगा। WHO में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके इस वैज्ञानिक ने ये दावा किया है कि कोरोना का पैटर्न बताता है कि धीरे धीरे वो कमजोर पड़ जाता है और इसीलिए दुनिया को विज्ञान को दवा दे। उससे पहले ही कोरोना कुदरती मौत मर जाएगा।

WHO जैसी प्रसिद्ध विश्व संस्था में कैंसर प्रोगाम को हेड कर चुके प्रफेसर करोल सिकोरा का शोध जगत में काफी नाम है और उन्होंने ये दावा कोरोना के संक्रमण के तरीके और उसके फैलाव के आंकड़ों की डीप स्टडी करने बाद ये निष्कर्ष निकाला है। सिकोरा ने कहा है कि कोरोना वायरस के खिलाफ दुनियाभर में जारी जंग वैक्सी न के बनाए जाने से पहले ही खत्म‍ हो सकती है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस वैक्सीनन के विकास से पहले ही अपने आप खत्म हो सकता है। सिकोरा ने कहा, ‘कोरोना वायरस के खिलाफ हर जगह एक जैसा ही पैटर्न दिखाई पड़ रहा है। मुझे संदेह है कि हमारे अंदर जितना अनुमान लगाया गया था, उससे ज्याहदा रोग प्रतिरोधक क्षमता है। हमें इस वायरस को लगातार धीमा करना है लेकिन यह अपने आप ही बहुत कमजोर हो सकता है। यह मेरा अनुमान है कि ऐसा संभव हो सकता है।

प्रोफेसर सिकोरा ने कहा कि ‘हमें अपनी दूरी को बनाकर रखना है और आशा करनी है कि आंकड़े बेहतर होंगे।’ इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस का लंबे समय तक समाधान केवल वैक्सीरन या दवा से संभव है। उन्होंने कहा, ‘सबसे खराब स्थिति यह हो सकती है कि हम कभी कोरोना वायरस की वैक्सीन ही न खोज सकें।’

मतलब जब पूरी दुनिया कोरोना से जंग में हिम्मत हार रही है तब ये दावा किया जा रहा है कि कोरोना खुद ब खुद खत्म हो जाएगा। इस बयान के पीछे वैज्ञानिक आधार हैं। क्योंकि लंबे वक्त से किसी वायरस से जूझ रहे इसांनी शरीर की खासियत है कि वो वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बना लेता है।

दुनिया भर में कोरोना से लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। कई देशो में तो कोरोना ने ऐसी तबाही मचाई है कि उससे उबरने में उन्हें सालों लगेंगे। कई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना का वायरस तेजी से म्यूटेट हो रहा है। मतलब वो जरुरत के हिसाब से खुद को ढाल कर और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है। यही वजह की शुरुआती दिनों में शरीर के श्वसन तंत्र को निशाना बनाने वाला वायरस अब हमारे नर्वस सिस्टम पर भी तेजी से हमला कर रहा है। पहले सर्दी खांसी छींक से पकड़ आ जाने वाला कोरोना अब खुद को इतना बदल चुक है कि ज्यादातर नए मरीज ASYMPTOMATIC हो गए हैं। मतलब इन मरीजों मे बाहर से कोरोना का कोई लक्षण ही नजर नहीं आ रहा। हालांकि इन रिसर्च के साथ साथ ये दावा भी बिल्कुल सही है कि कोरोना के संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ने के बाद नीचे आना शुरु होता है जैसा कि इटली, फ्रांस, ईरान में नजर आया है।

कोरोना के इलाज को लेकर जितने मुंह उतनी बातें सामने आ रही हैं। कोई कह रहा है कि दुनिया को कोरोना का इलाज कभी नहीं मिलेगा जैसे HIV और दूसरी बीमारियों का नहीं मिला और हमें इसके साथ जीने की आदत डालनी होगी तो कोई दुनिया भर में चल रहे ड्रग ट्रायल को लेकर काफी पॉजिटिव है, लेकिन कोरोना के अपने आप खत्म हो ने का ये दावा बेहद चौंकाने वाला है। जाहिर है अगर ऐसा होता है तो कुदरत की इस चुनौती का जवाब कुदरत ही देगी और विज्ञान को एक बार फिर एहसास होगा कि एक अदद वायरस ने हमारे पूरे विज्ञान और पूरी दुनिया को कैसे घुटनों पर ला दिया है।

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