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महाभारत युद्ध के बाद विधवा महिलाओं का क्या हुआ था


युद्ध किसी का भी हो और किसी भी कारण हो परंतु इसमें होने वाला सबसे बड़ा नुकसान युद्ध में मारे गए सैनिकों की पत्नी का होता है। इसी प्रकार धर्म और अधर्म के बीच लड़े गए महाभारत के युद्ध में अनेकों सैनिकों ने मिलकर लड़ा था। और कुछ चंद योद्धाओं को छोड़कर सभी योद्धा उस युद्ध में मारे गए थे, और मारे गए योद्धाओं की पत्नियों का बाद में क्या हुआ था, यह बात महाभारत युद्ध के 15 वर्ष के बाद की है।

उस समय पांडवों की माता देवी कुंती धृतराष्ट्र, गांधारी सभी सन्यास होकर आश्रम में निवास कर रहे थे। तभी एक दिन सहदेव के मन में माता कुंती के दर्शन करने की इच्छा उत्पन्न हो गए यह सुनकर सभी पांडवों ने वन जाने की तैयारियां शुरू कर दी। राजा युधिष्ठिर और पांडवों के साथ हस्तिनापुर की सारी जनता चल पड़ी थी। और इनमें वह सभी विधवा महिलाएं भी थी, जिनके पति महाभारत के युद्ध में मारे गए थे। और वह सभी लोग एक माह तक धृतराष्ट्र के आश्रम के आसपास ही रुके थे।

एक बार पांडवों के पितामह ऋषि वेद व्यास जी धृतराष्ट्र के उस आश्रम में पांडवों से मिलने के लिए आए थे। तब उन्होंने देखा कि पांडवों सहित वह सभी हस्तिनापुर के वासी अपने बंधुओं और घरवालों के शौक में डूबे हुए हैं। जिन्होंने महाभारत के युद्ध में वीरगति पाई थी, तब वेदव्यास जी ने कहा कि मैं तुम्हें स्वर्ग या दूसरे लोकों में वास कर रहे बंधुओं और घरवालों से मिलऊंगा। तब तुम स्वयं ही उनसे मिलकर उनका हाल पता कर लेना तब वेदव्यास सूर्यास्त के समय गंगा नदी के तट पर ले गए। और सूर्यास्त होने के बाद उन्होंने गंगा नदी के जल में खड़े होकर अपने तपस्या बल से महाभारत युद्ध में मारे गए सभी योद्धाओं को बुला लिया था।

और वह सभी योद्धा गंगा नदी के जल से इस प्रकार बाहर निकल आए जैसे वह सभी उस गंगा नदी में ही वास करते हो, यह देख सभी हस्तिनापुर वासी बहुत प्रसन्न हो गए थे, और अपने घर वालों से मिलकर उनका हालचाल लेने लग गए थे। इसलिए सभी के मन में अपनों का मृत्यु का जो शौक था, वह हमेशा के लिए समाप्त हो गया था। और कुछ ही समय बाद महर्षि वेदव्यास जी के आवाहन से आए वह योद्धा अपने लोको को वापस जाने के लिए वापस गंगा के जल में डुबकी लगाकर अदृश्य होने लगे थे।

तब महा ऋषि व्यास जी ने वहां उपस्थित योद्धाओं की सभी विधाओं से यह कहा था, कि जो स्त्रियां अपने पतियों के साथ उनके लोक में जाना चाहती है, वह गंगा देवी की इस पवित्र धारा में अपना जीवन त्याग दें। वेदव्यास जी की यह बात सुनकर वह सभी महिलाएं जो अपने पतियों से असीम प्रेम करती थी। वह गंगा की उस धारा में कूद पड़ी थी और अपने प्राणों को त्याग कर अपने पतियों के लोक को चली गई थी।

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