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Lockdown Effect: दुनियाभर में 20 % बढ़ी घरेलू हिंसा, 4.4 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं कर पाई


दुनियाभर में जहां लॉकडाउन की स्थिति में लोग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं वहीं घरों के अंदर घरेलू हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। भारत सहित फ्रांस, इटली और पेरिस जैसी जगहों पर भी घरेलू हिंसा के मामलों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यूएन पॉपुलेशन फंड(UNPF) के अनुसार दुनियाभर में लॉकडाउन की वजह से घरेलू हिंसा में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। अनुमान है कि सिर्फ पाबंदियों के चलते इस साल दुनियाभर में घरेलू हिंसा के 1.5 करोड़ मामले आ सकते हैं। इन नए आंकड़ों ने अगले दशक में महिलाओं की बेहतर जिंदगी की उम्मीदों भरी तस्वीर काे धुंधला कर दिया है।

UNPF के अनुसार पिछले तीन महीने में दुनियाभर में 4.4 करोड़ महिलाएं पाबंदियों के चलते गर्भ निरोधक उपायों का इस्तेमाल नहीं कर सकी हैं। यह महिलाएं 114 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहती हैं। इसके चलते करीब 10 लाख अनचाही प्रेग्नेंसी होंगी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पाबंदियों के चलते अगले 10 साल में 53 लाख लड़कियों की समय से पहले शादी हो सकती है। 1.3 करोड़ लोगों का बाल विवाह हो सकता है। इससे बाल विवाह के खिलाफ चल रहे तमाम कार्यक्रम भी बाधित होंगे।

इंटरनेशनल प्लान्ड पैरेंटहुड फेडरेशन के अनुसार कोरोना के चलते 64 देशों में 5,000 से अधिक क्लीनिक बंद हो गए हैं। मैरी स्टॉप्स इंटरनेशल ने अनुमान जताया है कि पाबंदियों के चलते दुनिया में 30 लाख अनचाही प्रेग्नेंसी हो सकती हैं। तकरीबन 27 लाख असुरक्षित गर्भपात हो सकते हैं। 11,000 से ज्यादा गर्भावस्था से संबंधित मौतें हो सकती हैं।

UNPF की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर नातालिया कानेम के अनुसार यह आकलन दुनियाभर से मिले आंकड़ों पर आधरित है। हर देश के प्रशासन ने बताया है कि कोविड-19 और लॉकडाउन के चलते घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ है।

इन आंकड़ों का UNPF और उसके पार्टनर एवेनिर हेल्थ, जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ने विश्लेषण किया। इससे निकलकर आया कि पिछले 3 महीने में संयुक्त राष्ट्र संघ के 193 सदस्य देशों में घरेलू हिंसा के मामले पहले से 20% बढ़ गए हैं।

शोधकर्ताओं ने अनुमान जताया है कि यदि दुनियाभर में आगे भी लॉकडाउन बढ़ाया जाता है तो हर तीन महीने में घरेलू हिंसा के 1.5 करोड़ अतिरिक्त मामले सामने आ सकते हैं। इससे यूएन के घरेलू हिंसा के रोकथाम कार्यक्रम पर भी असर पड़ना तया है। यूएन ने 2030 तक ऐसे मामलों में दो तिहाई तक कमी लाने का लक्ष्य रखा है।

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूएन पापुलेशन फंड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नतालिया कनेम ने इस बारे में चिंता जाहिर की है। फंड का कहना है कि उनके पास घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले दर्ज किए जाने लगे हैं। महामारी की वजह से जारी लॉकडाउन के चलते घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ है।

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