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हिमाचल : कोरोना से युवक की मौत ने खोली सरकार की तैयारियों की पोल, बिना पीपीई किट के कर डाला दाह संस्कार


कोविड-19 से मंडी के युवक की मौत ने प्रदेश सरकार के तमाम इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। युवक के दाह संस्कार में जिस तरह की अव्यवस्था और लापरवाही देखने को मिली है वह अन्य लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। हैरानी इस बात की है कि शिमला के कनलोग श्मशानघाट में केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन को ठेंगा दिखाते हुए कोरोना पॉजीटिव युवक के शव का दाह संस्कार किया गया। शव को मुखाग्नि देने वाले दोनों चौकीदार समेत कर्म करने वाले पंडित ने बिना पीपीई किट (सुरक्षा किट) के दाह संस्कार कर डाला।

जिला प्रशासन और एमसी आमने-सामने

एसडीएम शहरी नीरज चांदला भी मौके पर बिना पीपीई किट के रात तकरीबन 12:45 बजे तक मौजूद रहीं। आधी रात में एक महिला अधिकारी को इस तरह श्मशानघाट पर भेजना भी सरकार और जिला प्रशासन के प्रबंधों पर कई सवाल खड़े कर रहा है। युवक के दाह संस्कार के बाद अफसरशाही में ब्लेम-गेम शुरू हो गई। जिला प्रशासन और एमसी आमने-सामने आ गए हैं। कोविड-19 मरीज के दाह संस्कार को एमसी शिमला अपनी जिम्मेदारी मानने को तैयार नहीं, वहीं प्रशासन कोविड संक्रमित शव का दाह संस्कार एमसी की जिम्मेदारी बता रहा है।

एमएचए की गाइडलाइन में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी

एमएचए की गाइडलाइन में कोविड पीड़ित के शव के दाह संस्कार को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बताया गया है लेकिन सरकाघाट के युवक के शव के दाह संस्कार के लिए बीती रात कनलोग शमशानघाट लाने वाले स्वास्थ्य कर्मी तकरीबन 15 मिनट बाद मौके से चले गए जबकि शव को श्मशानघाट लाने वाले सभी स्वास्थ्य कर्मी सुरक्षा किट पहने हुए थे। इसलिए उनकी भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

लापरवाही के बाद लोगों में मचा हड़ंकप

युवक के दाह संस्कार में जैसी लापरवाही सामने आई है, उसे देख लोगों में हड़कंप मच गया है क्योंकि आईजीएमसी में कोविड से हुई पहली मौत ने सरकार, प्रशासन और एमसी के सभी इंतजामों को बेपर्दा कर दिया है। प्रदेश सरकार रोजाना अपनी पीठ थपथपाती रही है कि हिमाचल ने यह कर दिया, वह कर दिया, देशभर में हिमाचल मॉडल की सराहना हो रही है लेकिन आईजीएमसी में हुई मौत ने सरकार को आईना दिखा दिया है।

जाने कब-कब क्या हुआ

1. सरकाघाट का युवक सोमवार रात को आईजीएमसी रैफर किया गया।
2. आईजीएमसी में मंगलवार शाम 5.45 बजे युवक ने आखिरी सांस ली।
3. रात 11 बजे शव को दाह संस्कार के लिए श्मशानघाट ले जाया गया।
4. श्मशानघाट में पहले से मौजूद दो केयर टेकर ने पहले केवल मास्क और हैंड ग्लव्ज ही पहन रखे थे।
5. रात 12 बजे के बाद एमसी ने केयर टेकर को पीपीई किट दी।
6. लकड़ी लाने के लिए बुलाए गए एमसी के 2 कर्मियों को भी रात 12 बजे के बाद पीपीई किट दी गई।
7. रात 3:30 बजे शव जलकर राख हुआ।

क्या बोलीं एसडीएम नीरज चांदला

एमएचए की गाइडलाइन के मुताबिक स्वास्थ्य कर्मियों को ही पीपीई किट पहनने की जरूरत है। शव को उठाने व मुखाग्नि देने का काम इन्हीं का ही है। दाह संस्कार के वक्त जिला प्रशासन, एमसी और पुलिस का मौके पर मौजूद होना जरूरी है लेकिन आपसी तालमेल न होने के चलते एमसी और पुलिस का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं रहा।

क्या बोले एमसी आयुक्त

एमसी आयुक्त पंजक राय ने कहा कि कोविड संक्रमित के दाह संस्कार के लिए जिला प्रशासन की ओर से न तो मुझे फोन आया और न ही एमसी के संयुक्त आयुक्त को फोन आया। हमने एमएचए की गाइडलाइन के मुताबिकदाह संस्कार के वक्त सैनिटाइजेशन का काम किया है। कोविड संक्रमित शव को जलाना एमसी की जिम्मेदारी नहीं है।

क्या कहते हैं डीसी शिमला

जिलाधीश शिमला अमित कश्यप ने बताया कि हमने एमएचए की गाइडलाइन के मुताबिक युवक का दाह संस्कार किया है। मौके पर क्या हुआ, इस पर मैं कुछ टिप्पणी नहीं करना चाहता।

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