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क्या रहस्य था श्री कृष्ण द्वारा नहाती हुई गोपियों के कपड़े चुराने का


श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार और हिन्दू धर्म के ईश्वर माने जाते हैं। कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश, वासुदेव आदि नामों से भी उनको जाना जाता हैं। कृष्ण निष्काम कर्मयोगी, एक आदर्श दार्शनिक, स्थितप्रज्ञ एवं दैवी संपदाओं से सुसज्ज महान पुरुष थे।

श्री कृष्ण ने नहाती हुई गोपियों के कपड़े चुराकर पेड़ पर रख दिया इसी कारण से श्रीकृष्ण को कई लोग गलत बताते है। दरअसल श्री कृष्ण का इसके पीछे भी एक उद्देश्य था लोगों ने यह उद्देश्य तो जाना नहीं मगर कपड़े चुराने के लिए गलत जरूर मानने लगे।

क्या था उद्देश्य?
श्री कृष्ण ने गोपियों को कहा कि बाहर आकर अपने कपड़े ले लो। गोपियों ने बताया कि वह नग्न है वह बाहर नहीं आ सकती।

श्री कृष्ण ने उनसे दोबारा पूछा कि तुम लोग बिना वस्त्र के क्यों नहाने गई?
गोपिया ने उत्तर दिया- कि जब वह यहां नहाने आई तो यहां कोई भी उन्हें नहीं देख रहा था इसलिए वह बिना वस्त्र के ही नहाने चली गई।

तब श्री कृष्ण जी बोलते हैं कि मैं तो हर जगह मौजूद हूं इसलिए मैंने तुमको देखा, आकाश में उड़ रहे पक्षियों ने भी तुम लोगों को देखा, सभी छोटे जीवों ने में भी तुम्हें देखा, यहां तक कि जल देव ने भी तुम लोगों को देखा है और तुम लोगों ने उनका अपमान भी किया।

उनका उद्देश्य यही था कि नहाते वक्त आपको अपने वस्त्र शरीर पर धारण करनी चाहिए और विष्णु पुराण में भी साफ-साफ बताया गया है कि आपके वस्त्रों से जो पानी गिरता है उसी को पितर धारण करते हैं। इसलिए गरुड़ पुराण के अनुसार भी आपको बिना वस्त्र के नहीं नहाना चाहिए।

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