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यदि यह पौधा आपके भी खेत में है तो यह खबर एक बार जरूर पढ़ें


नागरमोथा एक पौधा है जो पूरे भारत में खरपतवार के रूप में उगता है। इससे इत्र बनता है और औषधि के रूप में इसका उपयोग होता है।
नागरमोथा के क्षुप प्राय भारत के सभी राज्यों में पाए जाते है। ये अधिक पानी वाली जगहों पर आसानी से देखने को मिल जाते है राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में भी बरसात के मौसम में एवं जलाशयों और पोखर के किनारों पर यह घास अधिक देखने को मिलती है। नागरमोथा पूरे भारत में नमी तथा जलीय क्षेत्रों में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसके झाड़ीनुमा पौधे समुद्र तल से 6 हजार फुट की ऊंचाई तक पाये जाते हैं। नागरमोथा नदी और नालों के किनारे की नमी वाली भूमि में पैदा होते हैं। पुष्प (फूल) जुलाई में तथा फल दिसम्बर के महीने में आते हैं।
दस्त होने पर नागरमोथा , आंवला , अदरक इन सभी को 10 – 10 ग्राम की मात्रा में ले और इसमें 30 ग्राम सौंठ मिलाकर चूर्ण बना ले। इसका प्रयोग करने से दस्त बंद हो जाते है एवं प्लीहा के रोगों में भी फायदा पहुँचता है |
नागरमोथा के फल का काढ़ा बनाकर 20-40 ग्राम प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से मुंह से थूक आना तथा मुंह के छाले अपने आप कम हो जाते हैं।
नागरमोथा (मोथा) के फल का काढ़ा बनाकर शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से बुखार, दस्त और पित्त के बुखार में आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त मोथा में स्वेदजनक (पसीना लाने वाला), मूत्रजनक (पेशाब लाने वाला) और उत्तेजक होता है।

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