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जय देव माहुनाग मंदिर पहाड़ी वास्तुकला की शैली को प्रदर्शित करता है, जानिये इस मंदिर के बारे में…


मंडी। माहुनाग मंदिर मंडी जिला के बखारी कोठी नामक स्थान पर स्थित है। यह स्थान शिमला से 93 km, करसोग से 35 km तथा चुराग से 14 km की दुरी पर समुद्र तल से लगभग 6200 फुट की ऊंचाई पर विद्यमान है।

मंदिर पहाड़ी वास्तुकला की शैली को प्रदर्शित करता है, पहाड़ी भारत के उत्तर की ओर हिमालय की तलहटी में रहने वाले लोगों के समूहों की एक व्यापक सामान्यीकरण के रूप में एक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर विश्वास करें तो यह मंदिर 1664 में राजा श्याम सेन द्वारा निर्मित किया गया था।

यहाँ माहुनाग देवता को दानवीर कर्ण का अवतार माना जाता है माहुनाग की उत्पत्ति यहाँ के एक गाँव शैन्दल में हुई थी। जब एक किसान खेत में हल जोत रहा था, तो अचानक एक जगह आ कर हल जमीन में अटक गया, किसान के बहुत प्रयत्न करने पर भी जब हल बाहर नहीं निकला तो मिट्टी हटा कर देखा गया।

तब पता चला कि यहाँ एक मोहरा (पत्थर की मूर्ति) जमीदोज है इसे बाहर निकालने का प्रयास हुआ मगर जैसे ही मोहरा बाहर आया तो यह वहाँ से उड़ गया और बखारी में स्थापित हो गया। यह घटना सदियों पुरानी है, जो एक अलिखित इतिहास का हिस्सा है, तथा जनश्रुति पर आधारित है।

आपको बता दें कि समूचा मंदिर परिसर लकड़ी और पत्थर से लोक शैली में निर्मित है मंदिर तथा सरायें की छतें स्थानीय पत्थर से निर्मित स्लेटों से बनी है। मंदिर के उपरी भाग में चारों और से एक लकड़ी का बरामदा तैयार किया गया है जिसमे की लकड़ी को ही उम्दा किस्म की काश्तकारी से तराशा गया है। लोक शैली से बना यह मंदिर देखने मैं बहुत सुन्दर तो है ही अपितु यहाँ श्रधालुओं के ठहरने का भी उचित प्रबंध मंदिर कमेटी द्वारा किया गया है।

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