Breaking News

हिमाचली मुंडा-रूसी गर्ल: लॉकडाउन ने रोकी थी राह, अब मिली मंजिल, शादी रचाई


शिमला. आखिरकार प्यार  को उसकी मंजिल मिल गई है. जितेंद्र और लीडिया सात जन्मों के लिए एक दूजे के हो गए. मामला हिमाचल के कुल्लू जिले का है. हिमाचली गबरू जिंतेद्र और रूसी बाला लीडिया ने आखिकार लंबी जद्दोजहद के बाद शादी कर ली है. दोनों ने बीते माह 29 मई को कोर्ट मैरिज  की है और अब आने वाले समय में कुल्लू में दोनों धूमधाम से धार्मिक रिति-रिवाज से शादी करेंगे. प्रशासन से पास मिलने के बाद अब जितेंद्र और लीडिया छह जून यानी आज, शनिवार को अपने घर कुल्लू पहुंच गए हैं.

दो बार टल गई शादी कुल्लू के ऑउटर सराज के निथर क्षेत्र के दुराह गांव के रहने वाले जितेंद्र और रूस की रहने वाली लीडिया वोल्फ के साथ शादी करना चाहते थे. वह दोनों नोएडा में एक साथ रह रहे थे. इस दौरान लॉकडाउन की वजह से वह दोनों वहां फंस गए. जनवरी से दोनों नोएडा में रह रहे थे. शादी का प्लान बनाया तो वापस अपने गांव आना था. जरूरी कागजात तैयार कर लिए थे. लीडिया ने भी रूस की सरकार से दूतावास के जरिए शादी की मंजूरी ले ली थी. लेकिन अवैध तरीके से एक ट्रक में शिमला पहुंचे और यहां शोघी बैरियर पर पकड़े गए. पुलिस ने इन्हें बाद में नोएडा वापस भेज दिया था. इससे पहले भी युवक के पिता की मौत की वजह से उनकी शादी टल गई थी. अब दोनों ने कोर्ट मैरिज की है.

दोनों को नोएडा प्रशासन की ओर से जारी किया गया मैरिज सर्टिफिकेट.

कहां मिले दोनों: जितेंद्र कुल्लू के कसोल में एक कैफे चलाते हैं. लीडिया कलाकार हैं. पेंटिग बनाती हैं. कुछ साल से भारत में हैं और दिल्ली एनसीआर में काम कर रही हैं. 2 साल पहले लीडिया जितेंद्र के कैफे में आई थी. लीडिया को देखते ही जितेंद्र अपना दिल दे बैठे. बातें-मुलाकातें बढ़ीं और दोनों का प्यार परवान चढ़ा. फिर शादी का फैसला किया. लीडिया जितेंद्र से 9 साल बड़ी है. जितेंद्र की उम्र 24 और लीडिया 35 साल की हैं.

घर वालों को शादी के लिए किया राजी: दोनों ने अपने घर वालों को राजी किया और शादी का फैसला किया. लेकिन, इसी बीच कुछ समय पहले जितेंद्र के पिता की मृत्यु हुई तो शादी टल गई. दूसरी बार लॉकडाउन की वजह से वह घर नहीं पहुंच पाए और लॉकडाउन उनकी राह में रोड़ा बन गया.

जब कहानी में आया ट्विस्ट: 
पांच मई को जितेंद्र और लीडिया दिल्ली से एक ट्रक में शिमला पहुंचे. दवाओं के ट्रक के चालक ने उनसे पैसे लेकर उन्हें शिमला छोड़ने की बात कही. दोनों ने नोएडा में किराए पर मकान छोड़ दिया और जरूरी सामान गाड़ी में भरकर 5 मई की शाम को नोएडा से चल पड़े. गाड़ी वाले से किराए के रूप में 16 हजार रुपये की बात हुई थी.बाद में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ और हिमाचल के परवाणु बोर्डर पर भी किसी ने नहीं रोका. लेकिन सात मई को जैसे सुबह के समय शिमला जिले के शोघी बॉर्डर पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें रोक दिया था.

No comments