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इस तरह खुला बड़ा राज़, चीन में अगस्त में ही फ़ैल चुका था कोरोना वायरस, चीन ने दी ये प्रतिक्रिया


जिस कोरोना वायरस से आज सारी दुनिया परेशान है, वो सबसे पहले चीन के वुहान में देखा गया. कहा गया कि वुहान में कोरोना वायरस सबसे पहला केस दिसम्बर में देखने में आया. कोरोना वायरस का नाम कोविड-19 भी ‘कोरोना वायरस दिसम्बर-2019’ को दर्शाते हुए रखा गया. इसके कुछ ही समय बाद कहा गया कि वुहान में कोरोना वायरस नवम्बर से ही कह’र ढाने लगा था लेकिन चीनी सत्ता ने इस बात को भरसक दबाये रखने की कोशिश की. लेकिन अब एक और नया खुलासा किया गया है. कहा जा रहा है कि चीन में कोरोनावायरस का संक्रमण पिछले साल अगस्त में ही शुरू हो गया था. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की स्टडी में यह दावा किया गया है. हालांकि चीन ने दुनिया को इस संक्रमण की जानकारी 31 दिसंबर को दी थी. स्टडी करने वाली टीम ने कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी की मदद से वुहान शहर की कुछ तस्वीरों की स्टडी की है.

ये तस्वीरें अगस्त 2019 और इससे ठीक एक साल पहले की हैं. इनमें वुहान शहर के अस्पतालों के बाहर बड़ी संख्या में वाहन दिख रहे हैं. इससे पहले वुहान में इस तरह भीड़ सिर्फ संक्रमण के चलते ही दिखी है. स्टडी के अनुसार संभव है कि रिपोर्ट किए जाने से बहुत पहले ही चीन में कोरोना का प्रको’प शुरू हो चुका था. अगस्त से ही वुहान के 5 बड़े अस्पतालों के बाहर आश्चर्यजनक तौर पर वाहनों की भीड़ थी. हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि जो लोग अस्पताल पहुंचे उन्हें मौसम की वजह से खांसी-बुखार और डायरिया के मरीज समझकर इलाज किया गया हो. संभव है कि डॉक्टर्स को इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चला होगा.

इतना ही नहीं, चीन में उसी समय में सर्च इंजन पर ‘खांसी’, ‘जुकाम’ जैसी कोरोना वायरस के लक्षण वाली शारीरिक व्याधियों को सबसे ज्यादा सर्च किया गया. इस बारे में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह बकवास है, बिलकुल बकवास है. ट्रैफिक वॉल्यूम जैसी सतही ऑब्जर्वेशन के सहारे ऐसा नतीजा निकालना. माना जाता है कि नवंबर में वायरस सबसे पहले चीन में देखा गया था. 31 दिसबंर को वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन को निमोनिया के मामलों की जानकारी दी गई, जिनकी जड़ के बारे में नहीं पता था.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) की ताजा स्टडी में पता चला है कि भारत में कोरोना वायरस चीन से नहीं, बल्कि यूरोप, मध्य पूर्व, ओशिनिया और दक्षिण एशियाई देशों से आाया है. इन्हीं देशों से भारत में सबसे ज्यादा लोग आए. वैज्ञानिकों ने यह दावा जीनोमिक्स स्टडी के आधार पर किया है. अमेरिका में कोरोना के क’हर के बीच यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अगस्त तक देश में 1.45 लाख लोगों की मौ’त हो सकती है.

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