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पुराने स्कूटर के इंजन से बना डाला खेतों में बुआई करने का हल


बिलासपुर अगर मन में कुछ नया करने की ढृढ़ इच्छा हो तो आयु भी बाधा नहीं बनती है। जी हां! ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, जिला बिलासपुर के स्वारघाट में 70 वर्षीय एक बुजुर्ग जगदीश चंद ने। इस व्यक्ति ने एक स्कूटर के पुराने इंजन से मशीन बनाकर एक नया आविष्कार किया है।

स्वारघाट के साथ लगते गांव टाली जकातखाना के जगदीश चंद ने घर में पड़े एक पुराने स्कूटर का इंजन और कुछ दूसरे हिस्सों का प्रयोग करके खेतों में बुआई करने का हल स्वयं तैयार करके यह साबित कर दिया कि रचनात्मक सोच के आगे उम्र कोई मायने नहीं रखती।

रोजाना 7 से 8 घंटे काम करना है पसंद: हालांकि जगदीश चंद कोई ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है और न ही कोई इंजीनियर की डिग्री हासिल की है। स्कूटर के पुराने इंजन से हल बनाने की खोज से उन्होंने कबाड़ से जुगाड़ की कहावत को वास्तव में चरितार्थ कर दिया है।

मिस्त्री नाम से जाने जाने वाले जगदीश चंद पेशे से एक वेल्डर होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छे कारपेंटर भी हैं। आज भी वर्कशॉप पर रोजाना 7-8 घंटे काम करना पसंद करते हैं। जगदीश चंद इन दिनों आधुनिक हल से खेती करने में मशगूल हैं।

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