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1 जुलाई को योग निद्रा में जाएंगे श्रीहरि, 5 महीने तक रहेगा चातुर्मास


धरती पर जीवजंतु ही नहीं बल्कि ब्रह्माण्ड में देवता भी निद्रा में जाते हैं और धार्मिक दृष्टि से उसका भी विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु अब 4 महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन होने जा रहे हैं

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ Chaturmas 2020: धरती पर जीवजंतु ही नहीं बल्कि ब्रह्माण्ड में देवता भी निद्रा में जाते हैं और धार्मिक दृष्टि से उसका भी विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु अब 4 महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन होने जा रहे हैं और उनके योग निद्रा में जाते ही चातुर्मास आरंभ हो जाएगा। ऐसी मान्यता भी है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु यानी श्री हरि पाताल के राजा बलि के यहां चार मास निवास करते हैं और योग निद्रा में रहते हैं। अब 1 जुलाई को भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन होने जा रहे हैं। यह ऐसा समय होगा, जब तमाम शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होंगे लेकिन ध्यान व योग साधना करने वालों के लिए यह समय सबसे अनुकूल होगा। व्रत, भक्ति और शुभ कर्म करने पर कई गुना अधिक फल मिलेगा।

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ हो जाता है और इसका हमारी संस्कृति व शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता भी है कि जब भगवान विष्णु योग निद्रा में लीन हो जाते हैं तो आसुरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। इस वजह से शादी, सगाई, गृह प्रवेश सहित अन्य शुभ व मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है क्योंकि ऐसे समय को इन कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। ऐसी भी मान्यता है कि जब भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं तो भगवान शिव धरती को आसुरी शक्तियों से बचाते हैं। यही वजह है कि इन चार महीनों के दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना व आराधना की जाती है ताकि उनका विशेष आशीर्वाद हासिल करके जीवन को सुखमय बनाया जा सके। ऐसा भी कहा जाता है कि चातुर्मास के दौरान जो लोग शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं, उन्हें जीवन में कोई दिक्कत नहीं आती बल्कि धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

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इस बार 1 जुलाई से चातुर्मास आरंभ होने जा रहा है और संयोग देखिए कि इस बार यह चतुर्मास चार महीनों का नहीं बल्कि 5 महीनों का होगा क्योंकि इस बार अधिकमास पड़ेगा। जिस कारण से अश्विन माह दो होंगे और अधिक मास होने के कारण चातुर्मास 5 महीने चलेगा। 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चतुर्मास आरंभ हो रहा है और देवोत्थान एकादशी के साथ इस माह का समापन होते ही फिर से शुभ व मांगलिक कार्य संपन्न होना शुरू हो जाएंगे। किवंदती के अनुसार देवशयनी एकादशी के 4 माह बाद भगवान विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागते हैं। इन चार माह को हमारे शास्त्रों में आत्म संयम का काल भी कहा जाता है।

हमारे शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास में सुबह जल्दी उठ कर नहा धोकर साफ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए और उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाया जाना चाहिए। पूजा में शुद्ध भाषा, पूजा-पाठ की सामग्री के साथ-साथ पीले फल और फूल अवश्य प्रयोग करने चाहिए।

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