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मौर्या साम्राज्य का खजाना इस गुफा में छुपा है, जानिए इसके बारे में


मौर्य राजवंश (322-185 ईसापूर्व) प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली राजवंश था। मौर्य राजवंश ने 137 वर्ष भारत में राज्य किया। इसकी स्थापना का श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मन्त्री कौटिल्य को दिया जाता है।
बिहार के नालंदा जिले के राजगीर में स्थित सोन भंडार गुफा के बारे में बता रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस गुफा के नीचे बेशकीमती खजाना दफन है। इसे लूटने के लिए अंग्रेजों ने तोप से गोले बरसाए पर नाकाम रहे। मौर्य शासक बिंबिसार ने अपने शासन काल में राजगीर में एक बड़े पहाड़ को काटकर अपने खजाने को छुपाने के लिए गुफा बनाई थी। इस गुफा के बारे में कहा जाता है की सोने को सहेजने के लिए इस गुफा को बनवाया गया था। जिस कारण इस गुफा का नाम पड़ा था सोन भंडार।

पूरी चट्टान को काटकर यहां पर दो बड़े कमरे बनवाए गए थे। गुफा के पहले कमरे में जहां सिपाहियों के रुकने की व्यवस्था थी। वहीं, दूसरे कमरे में खजाना रखा गया था। दूसरे कमरे को पत्थर की एक बड़ी चट्टान से ढंका गया है। जिसे आजतक कोई नहीं खोल पाया। अंग्रेजों ने इस गुफा को तोप के गोले से उड़ाने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसमें नाकामयाब रहे। आज भी इस गुफा पर उस गोले के निशान देखे जा सकते हैं।

अंग्रेजों ने इस गुफा में छिपे खजाने को पाने के लिए यह कोशिश की थी, लेकिन वह जब नाकाम हुए तो वापस लौट गए। सोन भंडार गुफा में अंदर प्रवेश करते ही 10.4 मीटर लंबा चौड़ा और 5.2 मीटर चौड़ा कमरा है। इस कमरे की ऊंचाई लगभग 1.5 मीटर है। यह कमरा खजाने की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए बनाया गया था। इसी कमरे के दूसरी ओर खाजाने का कमरा है। जो कि एक बड़ी चट्टान से ढंका हुआ है।

मौर्य शासक के समय बनी इस गुफा की एक चट्टान पर शंख लिपि में कुछ लिखा है। इसके संबंध में यह मान्यता प्रचलित है कि इसी शंख लिपि में इस खजाने के कमरे को खोलने का राज लिखा है।
इस जगह पर जैन धर्म के अवशेष भी देखने को मिलते हैं। यहां पर दूसरी ओर बनी गुफा में 6 जैन धर्म तीर्थंकरों की मूर्तियां भी चट्टान में उकेरी गई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यहां पर जैन धर्म के अनुयायी भी रहे थे। दोनों ही गुफा तीसरी और चौथी शताब्दी में चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं। इन गुफाओं के कमरों को पॉलिश किया गया है। इस तरह की गुफा देश में कम पाई जाती हैं।

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