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क्या कारण है कि ताजमहल को ही सात अजूबों में शामिल किया गया है ?


साल 2000 से 2007 के बीच स्विटज़रलैंड के न्यू सेवन वंडर्स फाउंडेशन द्वारा दुनिया के 200 ऐतिहासिक इमारतों को लेकर सर्वे कराया गया. दुनियाभर के करीब 10 करोड़ लोगों ने इस सर्वे में हिस्सा लिया, सर्वे के नतीजों के आधार पर साल 2007 में ताजमहल को दुनिया के सात नए अजूबों में शामिल किया गया. इस सूची में गीज़ा के पिरामिड को सम्माननीय सदस्य का दर्जा दिया गया. हालांकि इस सर्वे को यूनेस्को ने समर्थन नहीं दिया था । जब ये सर्वे चल रहा था तो ताजमहल सर्वे बंद होने से 2 दिन पहले तक 150वे नम्बर पर था लेकिन ही हिंदुस्तान के लोगो ने वोट करके इसको पहले नम्बर पर बना दिया था , वैसे तो पूरी दुनिया से ताजमहल के लिए वोट की गई थी क्योंकि पूरी दुनिया में ताजमहल को प्यार की इमारत के रूप में पेश किया गया है ।

कहा जाता है, कि जिन मजदूरों ने ताजमहल को बनाया था, शाहजहां ने उनके हाथ कटवा दिये थे। लेकिन इतिहास में वापिस लौटा जाये, तो ताजमहल के बाद भी कई इमारतों को बनवाने में उन लोगों ने अपना योगदान दिया जिन्होंने ताजमहल बनाया था। उस्ताद अहमद लाहौरी उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने ताजमहल जैसी भव्य इमारत का निर्माण किया था और उस्ताद अहमद की देखरेख में ही दिल्ली के लाल किले के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था।

जब ताजमहल बना था, तो उसकी कलाकृति में 28 तरह के कीमती पत्थरों को लगाया गया था। उन पत्थरों को शाहजहां ने चीन, तिब्बत और श्रीलंका से मंगवाया था। ब्रिटिश काल के समय इन बेशकीमती पत्थरों को अग्रेजों ने निकाल लिया था, जिसके बारे में यह कहा जाता है, कि वे बेशकीमती पत्थर किसी की भी आंखें चौंधियाने की काबिलियत रखते थे।

किसी भी इमारत के बनने के पहले और बाद में, जो बात सबसे पहले हमारे मन में आती है, वो ये है, कि इस इमारत के निर्माण में खर्च कितना आया था? तो हम बता देते हैं, कि ताजमहल के बनने में 32 मिलियन खर्च हुए थे ।

ताजमह के प्रांगण में लगे सारे फव्वारे एक ही समय पर काम करते हैं, और सबसे अश्चर्य में डाल देने वाली बात ये है, कि ताजमहल में लगा हुआ कोई भी फव्वारा किसी पाईप से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि हर फव्वारे के नीचे तांबे का टैंक बना हुआ है, जो एक ही समय पर भरता है और दबाव बनने पर एकसाथ काम करता है।

इस इमारत (tajmahal ka chitra)को देखने के लिए एक दिन में सबसे ज्यादा भीड़ इकट्ठी होती है। पूरी दुनिया में कोई ऐसी दूसरी इमारत नहीं है, जहां एक दिन में इतने सैलानी इकट्ठे होते हों। ताजमहल को देखने के लिए पूरी दुनिया से 12,000 के आसपास सैलानी हर रोज़ आगरा की ओर रवाना होते हैं।

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