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यह चीज अस्थमा, दाँत और जोड़ों के दर्द सहित 4 रोगों का है काल, जानें चौंकाने वाले फायदे


अगर आप भी अस्थमा, दांत दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो आज मैं आपके लिए एक आयुर्वेदिक नुस्खा लेकर आया हूँ. इस नुस्खे से आप इन सभी परेशानियों से निजात पा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं.

बता दें कि भटकटैया अस्‍थमा रोगियों के लिए फायदेमंद होता है. 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में भटकटैया की जड़ का काढ़ा या इसके पत्तों का रस 2 से 5 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह शाम रोगी को देने से अस्‍थमा ठीक हो जाता है. भटकटैया के पंचांग को छाया में सुखाकर और फिर पीसकर छान लें. अब इस चूर्ण को 4 से 6 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे 6 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करने से फायदा मिलता है.

भटकटैया दर्दनाशक गुण से युक्त औषधि भी है. दर्द दूर करने के लिए 20 से 40 मिलीलीटर भटकटैया की जड़ का काढ़ा या पत्ते का रस चौथाई से 5 मिलीलीटर सुबह शाम सेवन करने से शरीर का दर्द कम होता है. साथ ही यह अर्थराइटिस में होने वाले दर्द में भी लाभकारी होता है. समस्‍या होने पर 25 से 50 मिलीलीटर भटकटैया के पत्तों के रस में कालीमिर्च मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पिलाने से लाभ होता है. इसके अलावा सिर में दर्द होने पर भटकटैया के फलों का रस माथे पर लेप करने से सिर दर्द दूर हो जाता है.

अगर दाढ़ (जबड़े) में तेज दर्द हो रहा हो तो कटेरी के बीजों को जलाकर उसका धुआं लें. इससे दर्द में तुरंत आराम मिलता हैं. कटेरी की जड़, पत्ते व फल को मिलाकर काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से दांतों का दर्द ठीक होता है.

कफ, बुखार, दमा व छाती का दर्द आदि रोगों में कटेरी का प्रयोग बहुत किया जाता है. छाती में कफ पैदा होने पर कटेरी के फलों का काढ़ा बनाकर 50 मिलीलीटर काढे़ में 2 ग्राम भुनी हुई हींग व 2 ग्राम सेंधानमक डालकर पीना चाहिए. इससे कफ दूर होकर दमा रोग ठीक होता है.

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