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8 महीने बाद सेना को मिला नेगी का शव, आज आ सकता है शहीद का पार्थिव शरीर


8 महीने बाद सेना को 11वीं गढ़वाल राइफल के हवलदार राजेन्द्र सिंह नेगी का शव मिल गया है. दुर्भाग्य से ऐसा पहली बार नही है जब इस तरह की दुर्घटना हुई हो, इससे पहले 21 और 18 साल बाद बर्फ़ की चपेट में आए जवानों के शव मिले हैं. रविवार की दोपहर फ़ोन की घंटी ने राजेंद्र नेगी के परिवर की आठ महीने की उम्मीदें तोड़ दीं जब सेना की तरफ़ से राजेन्द्र सिंह नेगी के शव के मिलने की खबर दी गई. हालांकि शहीद राजेन्द्र के भाई दिनेश नेगी कहते हैं कि अब एक तरह से उनके परिवार को शांति भी मिल गई है जो पिछले 8 महीने से इस असमंजस में था कि क्या हुआ और राजेन्द्र को देख न पाने की टीस भी थी.

मांग में सिंदूर, माथे पर बिंदिया, हाथों पर चूड़ी सुहागिन की निशानी होती है और एक सुहागिन तब तक इसे लगाकर रखती है जब तक इस दुनिया से जाने से पहले वह अपने पति को चेहरा न देख ले. यही जिद थी 11 वी गढ़वाल राइफल के हवलदार राजेन्द्र सिंह नेगी की पत्नी राजेश्वरी देवी की जो 21 मई को सेना की तरफ से बैटल कैज़ुअल्टी का सर्टिफिकेट मिलने के बाद तक माथे पर सिंदूर और हाथों में चूड़ी पहने अपने पति के जिंदा या मृत आने का इंतज़ार कर रही थी.

इस बीच 5 अगस्त को सीएम त्रिवेंद्र की तरफ से भी लेटर शहीद के परिजनों को भेजा गया था जिसमें उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार के साथ राज्य सरकार के खड़े रहने का आश्वासन दिया था.

बर्फ में 8 महीने तक दबे रहने के बाद शहीद राजेन्द्र नेगी की बॉडी नार्मल टेम्परेचर में आकर खराब न हो इसलिए केमिकल ट्रीटमेंट के बाद ही परिवार को सौंपी जाएगी. शहीद के चाचा रघुबीर सिंह ने कहा कि हिन्दू धर्म के मुताबिक की शहीद को आख़िरी विदाई दी जाएगी, उनकी बॉडी को 19 तारीख के देहरादून पहुंचने की ख़बर है. केमिकल ट्रीटमेंट और पेपर वर्क में 2- 3 दिन लगने का समय लग सकता है. (देहरादून में शहीद राजेंद्र नेगी का घर)

बहरहाल 8 महीने तक संशय में जी रहा परिवार अब कम से कम अपनी ज़िंदगी मे आगे तो बढ़ पाएगा. इतना ज़रूर है कि भारतीय नारी की जिद की वजह से सेना भी डिगी नहीं बैटल कैज़ुअल्टी घोषित करने के बाद भी उनका सर्च आपरेशन जारी रहा.

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