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अटल पेंशन योजना में पैसा लगाने वालों के लिए बड़ी खबर, बदल गए स्कीम से जुड़े कई नियम


अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के तहत डेथ क्‍लेम प्रोसेसिंग की तारीख बढ़ गई है. पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए ने स्कीम के तहत डेथ क्लेम की प्रोसेसिंग की तारीख 30 अक्टूबर, 2020 तक कर दी है. इस बारे में 11 अगस्‍त को पीएफआरडीए ने सर्कुलर जारी किया है.पीएफआरडीए ने बताया कि कोविड-19 की महामारी के चलते अटल पेंशन योजना के तहत डेथ क्‍लेम की प्रोसेसिंग में आ रही अड़चनों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. यह दूसरा मौका है, जब इस डेडलाइन को बढ़ाया गया है. इससे पहले आखिरी तारीख 31 जुलाई रखी गई थी. क्‍लेम से जुड़े सभी दस्‍तावेजों को अंतिम तारीख तक सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी (सीआए) में जमा करने की जरूरत होती है.

11 अगस्‍त को जारी सर्कुलर में पीएफआरडीए ने कहा कि कोरोना की महामारी के चलते यात्रा पर लागू बंदिशों और सामान्य गतिविधियों के बाधित होने से निम्‍नलिखित फैसला लिया गया है .-एपीवाई के तहत स्कैन किए गए दस्तावेजों के आधार डेथ क्लेम प्रोसेसिंग की तारीख 30 सितंबर, 2020 तक के लिए बढ़ाई गई है. इसी के अनुसार फिजिकल डॉक्यूमेंट जमा करने की तारीख भी 30 अक्टूबर, 2020 तक बढ़ा दी गई है.

अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के मेंबर अब साल में कभी भी पेंशन कॉन्ट्रिब्‍यूशन की रकम घटा या बढ़ा सकते हैं. पेंशन नियामक पीएफआरडीए ने बैंकों से स्‍कीम के मेंबर्स से योगदान राशि में साल के दौरान किसी भी समय बदलाव के आग्रह को स्वीकार करने को कहा है. इस पहल का मकसद स्‍कीम को और आकर्षक बनाना है. यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू हो गई है. इससे पहले मेंबर्स को केवल अप्रैल में ही में योगदान राशि में बदलाव की अनुमति थी.

अटल पेंशन योजना मई 2015 में शुरू की गई थी. यह योजना 18 से 40 वर्ष के देश के सभी नागरिकों के लिए खुली है. इस योजना के तहत अंशधारकों को 60 साल के होने पर हर महीने में 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक पेंशन की गारंटी दी जाती है. यह उनकी ओर से दी गई योगदान राशि पर निर्भर करती है. इस योजना को चलाने की जिम्‍मेदारी पीएफआरडीए पर है.पॉलिसीधारक की असमय मौत हो जाने पर उसके जीवनसाथी को यह पेंशन दी जाती है. सब्‍सक्राइबर और जीवनसाथी दोनों की मौत हो जाती है तो उस स्थिति में नॉमिनी को जमा रकम वापस की जाती है.

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