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महिला सिपाही ने लगाई दारोगा जी की क्लास, आईजी ने की तारीफ


लॉकडाउन में रात में अपने दोस्तों के साथ गप लड़ा रहे एक दरोगा को महिला सिपाही ने डांट लगा दी। अब चूंकि गलती दरोगा जी की थी इसलिए वो भी बिना अपना परिचय दिए वहां से खिंसक लिए। इस पूरे वाकये को वरिष्ठ आईपीएस नवनीत सिकेरा ने अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है। मजे की बात ये है कि नवनीत सिकेरा की पोस्ट पर खुद दरोगा ने कमेंट कर अपनी गलती स्वीकार की है।

नवनीत सिकेरा का फेसबुक पोस्ट

हुआ यूँ कि मेरे पूर्व PRO रहे इंस्पेक्टर साहब अपने कुछ मित्रों के साथ रविवार के लॉकडाउन में गपड पंचायत कर रहे थे, रात के 10 बजे थे। इतने में एक अकेली महिला कांस्टेबल स्कूटी से वहाँ पहुंची और सबकी बढ़िया क्लास लगा दी । ये सभी 5-6 लोग मैडम की क्लास सुनते रहे और सॉरी के अलावा कोई शब्द नहीं था । सभी मित्र दरोगा जी की ओर देखें और दरोगा जी एक्स्ट्रा डाँट खाएं।

खैर सबने मैडम को सॉरी कहा और मैडम ने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और चली गयी। इस पूरे वाकिये में 3 बात गौर करने लायक हैं पहली मैं प्रीति सरोज की हिम्मत की सराहना करूँगा कि उन्होंने साहस से काम लिया , रात्रि के समय अकेले 5-6 लोगों से भिड़ने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। दूसरी प्रीति ने सबको लॉक डाउन के नियम के प्रति चेताया हड़काया पर कोई भी अपशब्द नहीं कहा। यही आदर्श तरीका होता है पुलिस की ड्यूटी करने का। ‘Firm BUT Polite’

तीसरी बात दरोगा जी और उनके साथियों ने विनम्रता से अपनी गलती मानी और अपने से अधीनस्त पुलिस कर्मी को बिना अपना परिचय दिए सॉरी कहा और इतना ही नहीं स्वयं फ़ोन करके इंस्पेक्टर आशियाना को फ़ोन करके प्रीति सरोज की तारीफ की। और मुझे भी प्रीति के साहस के बारे में बताया।

इस पूरे घटना क्रम में देखा जाए तो सभी के सभी धन्यवाद के पात्र हैं। मैनेजमेंट में इसे विन विन सिचुएशन कहा जाता है। यही एक आदर्श समाज और आदर्श नागरिक का गुण होता है। मुझे इस घटना से गुजरात की महिला कांस्टेबल सुनीता यादव की भी याद आयी , बहुत संभव है सुनीता ने हज़ारो अपनी सहकर्मी पुलिस कर्मियों को डयूटी के प्रति और निष्ठावान बनने के लिए प्रेरित किया हो।

नवनीत सिकेरा की पोस्ट पर दरोगा का कमेंट

सर, रात के 10 बजे होगें मै एक जरूरी काम से जा रहा था तभी मेरे दो तीन दोस्त अपने घर के सामने दिख गये मै रूक कर उनसे बात करने लगा रात के दस बज रहे होंगे मै सिविल कपडों में था तभी एक अकेली महिला आरक्षी आई और बड़े ही निर्भीकता के साथ हमे लाकडाउन के नियमों का पालन करने हेतु कहा और डाटा मैंने तुरंत माफी मांगी और सबको घर जाने को बोला. मेरे मित्रगण ने कहा कि आपने अपना परिचय क्यू नही दिया, मैंने बोला मै गलत था मुझे अपनी गलती स्वीकार करने में और माफी मांगने कोई झिझक नहीं है लेकिन अगर मैं अपना परिचय दूगां तो आमजनमानस में गलत सन्देश जायेगा व मेरे जूनियर्स का मनोबल गिरेगा| मुझे बहुत खुशी हुई अपने महिला आरक्षी की दिलेरी, कर्तव्यनिष्ठा निर्भीकता को देखकर|
मैंने सुबह एडिशनल SHO आशियाना को इस वाकये से अवगत कराते हुए उत्साहवर्धन व शाबाशी देने हेतु निवेदन किया|

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