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IAS बनकर ही आऊंगा राखी बंधवाने, 2 बहनों ने और बड़े भाई ने अधिकारी बनकर दिया जवाब, और फिर


योगेश, लोकेश, क्षमा और माधवी। ये चार नाम है उन भाई-बहनों के जिन्होंने इतिहास रच दिया। इन सबने वो कर दिखाया, जो संभवतया देश में पहली बार हुआ। महज तीन के अंतराल में चारों भाई-बहन आईएएस-आईपीएस बन गए। आइए आज रक्षाबंधन 2020 के मौके पर आपको बताते हैं इन चार अफसर भाई-बहनों की कामयाबी और संघर्ष की पूरी कहानी।

लालगंज के हैं ये अफसर भाई-बहन बता दें कि ये अफसर भाई-बहन उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज के रहने वाले हैं। देश में अफसर भाई-बहनों का जिक्र आता है तो सबसे पहले जेहन में लालगंज के अनिल मिश्रा के बेटे-बेटियां का नाम आता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में बतौर मैनेजर रहे अनिल मिश्रा का परिवार कभी दो कमरों के घर में रहा करता था। आज इनके परिवार में चार-चार अफसर हैं।

आईएएस से पहले नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे योगेश मिश्रा चार भाई बहनों में सबसे बड़े योगेश मिश्रा हैं। अन्य तीन भाई-बहनों के भी अफसर बनने की कहानी की शुरुआत योगेश मिश्रा से ही होती है। दरअसल, 2013 में सिविल सर्विस एग्जाम क्लियर करने से पहले योगेश नोएडा में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्य कर रहे थे। उस समय इनकी दोनों छोटी बहन श्रमा और माधवी दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं।

बड़े भाई ने ठाना पहले मैं आईएएस बनकर दिखाऊंगा मीडिया से बातचीत में योगेश मिश्रा बताते हैं कि 'रक्षाबंधन के एक दिन पहले दोनों के एग्जाम का रिजल्ट आया और वो फेल हो गई थीं। उसके एक दिन बाद मैं बहनों के पास राखी बंधवाने बहनों के लिए गया और उनके फेल हो जाने पर फिर से मेहनत करने के लिए हौसला बढ़ाया। साथ ही मैंने उसी दिन यह भी ठान लिया कि सबसे पहले मैं आईएएस बनकर दिखाऊंगा, जिससे अपने छोटे भाई-बहनों को प्रेरणा दे सकूं। मैं अगली बार बहनों से राखी बंधवाने तभी आऊंगा जब आईएएस बनूंगा। फिर मैंने तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में ही IAS बन गया। योगेश मिश्रा कोलकाता में राष्ट्रीय तोप एवं गोला निर्माण में प्रशासनिक अधिकारी भी रहे हैं।

योगेश के बाद माध्वी को मिली कामयाबी योगेश के बाद माधवी ने यूपीएससी परीक्षा 2014 में 62वीं रैंक पर बाजी मारी। माधवी झारखंड कैडर की आईएएस बनीं। केंद्र के विशेष प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में भी तैनात रहीं। भाई लोकेश ने सीएसई 2014 में रिजर्व लिस्ट में अपना नाम भी पाया हालांकि, उसे खुद पर भरोसा था और उसने इसे एक और शॉट देने का फैसला किया। फिर ये भी आईएएस बन गए। दूसरे नंबर की बहन क्षमा IPS हैं। इन्हें कर्नाटक में तैनाती मिली।

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