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गर्भवती पत्नी को परीक्षा दिलाने के लिए उसके पति ने 1200 KM का सफ़र स्कूटी से तय कर डाला


पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ख़ास होता है. दो लोग जीवन साथ निभाने का वादा करते हैं. सुख-दुःख में साथ देते हैं. मगर झारखंड के एक पति ने मिसाल कायम की है. उसने अपनी पत्नी का सपना पूरा करने के लिए 1200 किमी स्कूटी से तय कर डाले. 

दरअसल, 26 वर्षीय धनंजय कुमार की पत्नी 6 महीने की प्रेग्नेंट हैं. कुमार की 24 वर्षीय पत्नी सोनी टीचर बनना चाहती हैं. जिसके लिए वो डीलेड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) सेकंड ईयर का एग्जाम दे रही हैं. उनकी पत्नी का सेंटर ग्वालियर पड़ा, तो धनंजय ने 1200 किलोमीटर का (झारखण्ड से ग्वालियर) का सफ़र तीन में स्कूटी से तय किया.

रिपोर्ट के अनुसार, कुमार पेशे से एक कुक हैं. वो 10वीं क्लास तक भी शिक्षित नहीं हैं. दोनों की शादी पिछले साल ही हुई है. कुमार गुजरात की कैंटीन में काम करते थे. उनकी पत्नी और वो लॉकडाउन के बाद अपने घर गोड्डा आ गए.

कुमार ने बीते 23 अगस्त को अपने भाई को भी खो दिया. वह आर्थिक तंगी से भी गुज़र रहे हैं. उन्होंने कहा, “पत्नी की एग्जाम की डेट आ गई है. इसके लिए ग्वालियर चलना पड़ेगा. एक तो पैसे नहीं, ऊपर से जिस ट्रेन में टिकट कराया था, वह भी कैंसिल हो गई. पत्नी के पास पहुंचा तो वह बोली मेरे गहने गिरवी रख दो. उसके गहने गिरवी रखकर दस हजार रुपए मिले. जिस पर हर महीने 300 रुपए ब्याज देना है. 12 महीने में पैसे नहीं लौटाए तो गहने भी चले जाएंगे.”

मगर जब घर से स्कूटी पर बस पकड़ने निकले तो, एक सवारी का ढाई हजार किराया सुनकर परेशान हो गए. कुमार ने कहा, “हमारे पास सिर्फ 10 हजार रुपए थे. मैंने पत्नी को कहा कि आप चिंता मत करो, आगे से बस मिल जाएगी. मैं उन्हें लेकर स्कूटी से ही आगे बढ़ चला. कभी रुकते, कभी चलते,”

भागलपुर पहुंचने के बाद बाढ़ का पानी एक नयी समस्या बन गया. बारिश एक अलग परेशानी. मजबूरन इस कपल ने मुजफ्फरपुर में एक लॉज में 400 रुपए देकर कमरा लिया. इसके बाद दोनों अगली सुबह चार बजे लखनऊ के लिए निकल पड़े. क्योंकि सोनी प्रेग्नेंट थी, तो कुमार को और भी ज्यादा चिंता थी. उन्हें रात में होटल या गार्डन में ही रुकना पड़ा.

30 अगस्त की सुबह चार बजे हम वहां से निकले और दोपहर करीब तीन बजे ग्वालियर पहुंच गए. यहां 10 दिन के लिए 1500 रुपए का एक रूम मिला. पिछले तीन दिन से हम दोनों यहीं हैं, लेकिन अब हमें चिंता एग्जाम के बाद लौटने की है. हमारे सात हजार से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. देखते हैं क्या होता है... अभी 7 दिन तो यहीं रहना है. आगे भी कुछ न कुछ व्यवस्था तो हो ही जाएगी. आए हैं तो लौटेंगे भी….”

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