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बार बार गर्भपात– इन 12 आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से करें इलाज


गर्भपात होना एक आम समस्या है | लगभग हर महिला कभी न कभी ऐसी परिस्थिति से गुजरती है | लेकिन बार बार गर्भपात होना महिला के लिए बहुत दर्ददायी होता है | Bar Bar Garbhpat (Repeated Miscarriage) के कारण शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है |इसके कई कारण हो सकते हैं | आइये जानते हैं:-

गर्भपात क्या है ? (What is Miscarriage?)
इसके क्या लक्षण दिखाई देते है ? (Symptoms )
गर्भपात क्यों होता है ? (Causes of Miscarriage)
बार बार गर्भपात क्यों होता है ? (Causes of Multiple Miscarriage)
गर्भपात के बाद क्या सावधानी रखें ? (Precautions)
गर्भपात की आयुर्वेदिक दवा क्या है ? (Ayurvedic Medicine to Prevent Miscarriage)
गर्भपात बार बार (पेट में बच्चा नहीं ठहरना) हो तो शरीर पर इसके क्या दुष्प्रभाव होते हैं ?
बार बार गर्भपात (बच्चा गिर जाना ) हो तो क्या सावधानी बरतें ?
क्या बार बार गर्भपात होना बाँझपन की निशानी है ?बार बार गर्भपात

गर्भ लगने के बाद, 20 सप्ताह से पहले बच्चा गिर जाये तो इसको गर्भपात (Miscarriage) कहते हैं | चिकित्सकीय शब्दों में इसे सहज गर्भपात (spontaneous abortion) भी कहते है | ज्यादातर महिलाओं को पता ही नही लगता की उन्हें गर्भपात हो गया | क्योंकि सामान्यतः यह तीसरे या चोथे सप्ताह में होता है | इस कारण यह मासिक धर्म जैसा ही प्रतीत होता है |

एक आम जानकारी के अनुसार 80% गर्भधारण में गर्भपात हो जाता है | और यह तीन महीने से कम समय में ही हो जाता है | गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद गर्भपात (bar bar garbhpat) की संभावना कम होती है |
गर्भपात के लक्षण क्या हैं ? (What are the symptoms of Miscarriage/ Garbhpat)

आमतौर पर गर्भपात में भी वैसे ही लक्षण दिखायी देते हैं जैसे मासिक धर्म के दौरान दिखते हैं | इसलिए यह जान लेना बहुत जरुरी है की गर्भधारण हुवा है या नहीं | मासिक धर्म और गर्भपात में अंतर इस बात से पता लगाया जा सकता है की ज्यादातर गर्भपात में रक्तस्राव मासिक धर्म के मुकाबले ज्यादा समय तक होता है |
गर्भपात के लक्षण इस प्रकार हैं |
अधिक रक्तस्राव होना | (Heavy Bleeding)
पेट में बहुत ज्यादा दर्द होना | (Severe abdominal pain)
गंभीर एंठन होना | (Feeling heavy cramps)
पीठ दर्द एवं कमर दर्द होना | (Lower back Pain and back pain)
कमजोरी आना | (severe weakness)
बुखार के साथ पेट दर्द एवं रक्तस्राव होना |
योनी से रक्तस्राव के समय खून के कत्थे निकलना (Blood Clots) |
गर्भपात क्यों होता है ? (Garbhpat kyo hota h ?)

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में होने वाले रोग को वात, पित एवं कफ (त्रिदोष) में असंतुलन के द्वारा समझा जाता है | इन दोषों में से किसी भी दोष के कुपित होने से गर्भपात जैसी समस्या हो सकती है | गर्भपात के कारणों को जान लेना बहुत जरुरी है ताकि गर्भधारण के बाद आप वो सावधानियां रख सके, जिनसे गर्भपात (Bar bar garbhpat) से बचा जा सके |
गर्भ में किसी तरह का संक्रमण होने की स्थिति में |
हार्मोन के असंतुलित होने से |
वीर्य कमजोर होने से या शुक्राणुओं की कमी से |
भूर्ण निर्माण के समय अंडे या शुक्राणुओं में सक्रमण की वजह से |
आनुवंशिक कारणों से |
अपोषित आहार के कारण आई कमजोरी से |
नशे के कारण (जैसे शराब, धुम्रपान, ड्रग्स) |
आयु बढ़ने के साथ साथ गर्भपात की समस्या ज्यादा हो जाती है | (माता या पिता ) |
थाइरोइड या डायबिटीज जैसे रोग के होने से |
मोटापा भी गर्भपात का एक कारण हो सकता है |
गर्भाशय का आकार असामान्य होने की स्थिति में गर्भपात का ज्यादा खतरा रहता है |
उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर भी Garbhpat हो सकता है |
विषाक्त भोजन की वजह से
किसी दवा के दुष्प्रभाव हो जाने पर |
Bar Bar Garbhpat क्यों होता है ? (Repeated Miscarriage Causes)

संतान प्राप्ति व्यक्ति के जीवन में होने वाला सबसे सुखद अनुभव है | शादी के बाद किसी चीज का बेसब्री से इंतजार होता है तो वो है संतानोत्पति | माता पिता, दादा दादी, यहाँ तक की रिश्तेदार भी इस बात का इंतजार करते हैं कब उन्हें घर में बच्चे की किलकारियां सुनाई दें | ऐसी स्थिति में जब Bar Bar Garbhpat (Repeated Miscarriage) होने लग जाये तो बहुत बुरा लगता है | इसके साथ ही बार बार गर्भपात होने से महिला के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है |
आइये जानते हैं Bar Bar Garbhpat होने के क्या कारण हैं ?
आनुवंशिक कारणों से भूर्ण विकार होने के कारण बार बार गर्भपात हो सकता है |
असामान्य स्तर पर हार्मोन असंतुलित होने से |
बच्चेदानी में असामान्य संक्रमण होने के कारण Bar Bar Garbhpat हो सकता है |
पर्यावरण की स्थिति के कारण भी गर्भपात हो सकता है | ऐसा देखने को मिला है कि किसी दूसरी जगह (सामान्यतः ठन्डे पहाड़ी क्षैत्र ) जाकर गर्भ धारण करने पर गर्भपात की समस्या नहीं होती |
असक्षम गर्भाशय होने के कारण भी गर्भपात बार बार होता है | (Incompetent Cervix)
बहुत बार ऐसा भी होता है जब इसका कोई कारण ही पता नहीं चल पाता है |
श्वेत प्रदर या रक्तप्रदर जैसे समस्या होना |
गर्भाशय की उष्णता |
Bar Bar Garbhpat होने पर क्या सावधानी रखें ? (Precautions after Miscarriage)

सामान्य गर्भपात के बाद कुछ समय उपरांत शरीर पुनः स्वस्थ हो जाता है | लेकिंग Bar bar garbhpat होने पर इसके शारीरक और मानसिक दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं | इस स्थिति में खुद का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है | इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए |

बार बार गर्भपात होने पर इन बातों का रखे ध्यान :-
गर्भपात के कारण महिला की शारीरिक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है | इसलिए उचित आराम एवं खान पान अपनाये |
ध्यान रखें गर्भपात के बाद अगर रक्तस्राव ना रुके तो समय रहते चिकित्सक से मिलें |
मानसिक और शारीरिक रूप से अपने आप को सामान्य करने का प्रयास करें | नहीं तो आपका स्वस्थ्य बिगड़ सकता है |
बार बार गर्भपात होने की स्थिति में महिला एवं पुरुष को अपनी जाँच करानी चाहिए | ताकि पता लगाया जा सके की गर्भपात बार बार क्यों हो रहा है और इसका इलाज कैसे हो |
गर्भपात के बाद जब तक आप पूरी तरह स्वस्थ न हो जाये सहवास न करें |
अगर बार बार गर्भपात की समस्या है तो गर्भधारण से पहले चिकित्सक की उचित सलाह जरुर लें |
क्या Bar Bar Garbhpat होना बाँझपन का कारण बन सकता है ? ( can repeated miscarriage may result in infertility ?)

बाँझपन और बार बार गर्भपात होना दो अलग अलग बाते है | अगर किसी महिला को बच्चा नहीं ठहर रहा है तो इसका यह मतलब नहीं है कि वो माँ नही बन सकती | Bar Bar garbhpat में उचित समय पर उपचार करने से यह ठीक हो सकता है | लेकिन अगर इस समस्या को अनदेखा किया जाये तो आगे चलकर यह बाँझपन का कारण भी बन सकती है | यह बहुत जरुरी है की अगर बार बार गर्भपात हो रहा हो तो उचित उपचार (बार बार गर्भपात का आयुर्वेदिक दवा से इलाज) जरुर कराएँ एवं बतायी गयी सभी बातों का खयाल रखें |
12 आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां जिनसे संभव है बार बार गर्भपात का इलाज | (12 Ayurvedic Herbs which can cure Repeated Miscarriage)

आयुर्वेद प्रकृति का वो खजाना है जो हमें एक बेहतर स्वस्थ जीवन प्रदान करता है | लगभग सभी छोटे बड़े रोगों का उपचार आयुर्वेद से हो सकता है | हमारे आस पास खेत खलिहानों, उधानो एवं जंगलो में बहुमूल्य आयुर्वेदिक औषधियां पायी जाती है | जिनका उपयोग करके बहुत से रोगों से बचा जा सकता है | यहाँ पर हम उन 12 जड़ी बूटियों के बारे में बतायेंगे जो Bar Bar Garbhpat की समस्या में रामबाण औषधि का काम करती हैं |
Repeated Miscarriage
आयुर्वेद में है Bar Bar Garbhpat का उपचार | जाने 12 बहुमूल्य जड़ी बूटियों के बारे में :-

यहाँ पर हम उन 12 बहुमूल्य जड़ी बूटियों की लिस्ट दे रहें हैं जिनकी सहायता से आयुर्वेद के माध्यम से बार बार होने वाले गर्भपात की समस्या का इलाज संभव है | आइये जानते हैं उन जड़ी बूटियों के बारे में :-
1. कतीरा (Coahlospermum religiosum ) :-

इसको पिली कपास भी कहते हैं | यह मध्यम आकर का वृक्ष है | इसका गोंद बहुत उपयोगी होता है | महिलाओं को होने वाली सभी समस्यों ( जैसे :- गर्भपात , श्वेतप्रदर , रक्तप्रदर ) की यह कारगर औषधि है | बार बार गर्भपात को दूर करने के लिए 2 ग्राम कतीरा के साथ 1 ग्राम मिश्री मिला कर सेवन करना चाहिए |
2. कमल (Nelumbo Nucifera) :-

कमल (Lotus) से आप सभी परिचित हैं | फूलों में सबसे सुन्दर फुल वाला यह पौधा अपने औषधीय गुणों के कारण और भी ज्यादा उपयोगी हो जाता है | इसके फूलों का फाँट (काढ़ा ) बना कर देने से बार बार गर्भपात में त्वरित लाभ होता है | इसके अलावा रक्त रोगों एवं महिलाओं में कमजोरी के लिए भी कमल बहुत कारगर औषधि है |
3. कशेरुक (Scirpus Grossus) बार बार गर्भपात का रामबाण इलाज है :-

कशोरया एवं चिंचोढ नाम से भी जाना जाता है | इसका मुलकंद बहुत उपयोगी होता है | गर्भपात बार बार होने पर पर | इसके मुलकंद का 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ 15 दिन तक सेवन करना चाहिए | Bar Bar Garbhpat में यह सबसे कारगर औषधि है | इसके अलावा यह शुक्राणुओं को बढ़ाने, बलवर्धक, महिलाओं में दूध बढ़ाने एवं नेत्र रोगों में भी उपयोगी है |
4. खेजड़ा (Prosopis Cineraria):-

मध्यम आकार का यह वृक्ष पंजाब, राजस्थान, सिंध एवं बुंदेलखंड क्षैत्र में पाया जाता है | इसके फल बहुत उपयोगी होते हैं | खेजड़ा के फलों को कूटकर मिश्री के साथ सेवन करने से गर्भपात की समस्या में लाभ होता है |
5. दूर्वा (Cynodon dactylon) का स्वरस सेवन करने से दूर हो जाती है बार बार गर्भपात की समस्या |

दूब के बारे में आप सभी जानते हैं | इसे ही दूर्वा कहा जाता है | चर्म रोग, दाह रोग, अतिसार एवं गर्भपात में यह अतिगुणकारी औषधि है | Bar Bar garbhpat हो रहा हो तो गर्भावस्था में इसके घृत का सेवन करना चाहिए | इसका स्वरस भी गर्भपात को रोकने की दवा है |
6. पदमाख (Prunus Cerasoides) के बीज :-

पदमाख या पदमकाठ जिसको Bird Cherry भी कहते हैं |इसके बीज औषधीय गुणों वाले होते हैं | इसका उपयोग लाक्षादी तेल एवं चन्दनासव में होता है | यह गर्भस्थापक है यानि इसमें ऐसे गुण होते है जिससे गर्भधारण के बाद गर्भपात की समस्या को दूर किया जा सकता है | पदमाख के बीज जल में घिसकर (रस बनाकर ) पिलाने से Bar Bar garbhpat होना रुक जाता है |
7. मखाना है बार बार गर्भपात रोकने की आयुर्वेदिक दवा :-

मखाना (Euryale ferox) विशिष्ट आयुर्वेदिक गुणों वाला पौधा है | इसके बीज काफी उपयोगी एवं रोगहर गुणों वाले होते हैं | मखाना की खीर के फायदों (वीर्य वर्धक, प्रसव के दुर्बलता दूर करने में) के बारे में तो आप जानते ही होंगे | मखाना बीजों को पीस कर उसका काढ़ा बना कर पिने से रक्तस्राव बंद हो जाता है | गर्भाशय की उष्णता को दूर करने के लिए मखाना के आते के लड्डू गाय के घी में बनाकर खाएं |
8. श्रंगाटक (Trapa natans) से इलाज :-

सिंघाड़ा (श्रंगाटक) पानी में पनपने वाला औषधीय पौधा है | इसके पत्ते एवं बीज पित्त शामक होते हैं | इसका उपयोग रक्तविकार, अतिसार, शुक्राणुओं को बढ़ाने | एवं गर्भस्राव को रोकने में किया जाता है | बार बार गर्भपात की समस्या में 5 ग्राम (सिंघाड़े और कमल गट्टे) क चूर्ण को रोजाना दूध के साथ सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है |
9. शमी या छोंकर (Prosopis cineraria syn.) से गर्भस्राव रोके :-

यह बबूल या खेर की तरह दिखने वाला कांटेदार मध्यम आकार का वृक्ष है | इसके फूल एवं फल बहुत उपयोगी औषधीय गुणों वाले होते हैं | शमी के फूलों को पीस कर मिश्री में मिलाकर रोजाना (5 ग्राम) पिने से गर्भपात रुक जाता है |
10. पाठा (Cissampelos Pareira) :-

यह एक बेल होती है | जो जमीन पर फैलती है या छोटे वृक्षों पर फैली रहती है | इसका मूल एक आयुर्वेदिक औषधि है | श्वेतप्रदर में इसके मूल के साथ काली मिर्च मिलाकर सेवन करना चाहिए |श्वेत प्रदर की समस्या भी गर्भधारण नही होने का कारण है | ज्वर, कुष्ठ एवं हृदय रोग में भी इसका उपयोग होता है |
11. अश्मंतक (Bauhinia racemosa) से करें Bar Bar garbhpat का स्वदेशी उपचार :-

अश्मंतक एक झाड़ीदार मध्यम आकार का वृक्ष है | जो भारत में सर्वत्र पाया जाता है | गर्भस्राव को रोकने के लिए | अश्मंतक के साथ काले तिल, मजीठ एवं शतावरी को मिलाकर उसके चूर्ण को दूध के साथ सेवन कराना चाहिए | इससे गर्भपात रोकने में लाभ मिलता है |
12. पुनर्नवा (Boerhavia Diffusa) के bar bar garbhpat में औषधीय लाभ :-

पुनर्नवा को सांठी के नाम से भी जाना जाता है | यह समस्त भारत में पाया जाता है | वृषा ऋतू में पनपता है | इस छोटे आकार के पौधे में अनगिनत औषधीय गुण होते हैं | अनार्तव एवं कष्टार्तव जैसे रोगों में पुनर्नवा के पंचांग को कपास एवं मूल की छाल के क्वाथ के साथ देने से समस्या दूर हो जाती है | इस से बार बार गर्भपात में लाभ मिलता है |
जाने क्या होता है कष्टार्तव

इस लेख में जड़ी बूटियों के आयुर्वेदानुसार गुणों को बताया है | यह कोई चिकित्सकीय सलाह नही है | किसी भी तरह का उपचार करने से पहले चिकित्सक सलाह जरुर लें | यहाँ पर दी गयी जानकारी को उपचार न माने |

Post Source: swadeshiupchar.in

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