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लॉकडाउन में बिहार में फंस गया कश्मीर की बैट फैक्ट्री का मजदूर, अब खुद की फैक्ट्री शुरू कर रहा


बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रहने वाले अबुलेस अंसारी 5 साल से जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में बैट बनाने की फैक्ट्री में कारीगर थे. वह फरवरी में गांव आए थे. होली के बाद लौटना था. लेकिन, इस बीच लॉकडाउन लग गया और वह गांव पर ही रह गए. कुछ दिनों तक बेरोजगारी में समय बीता, लेकिन हाथ की कारीगरी है तो रास्ता निकलना ही था.

लॉकडाउन में साथियों के साथ वह क्रिकेट खेलते थे. इस बीच कुछ साथियों ने उन्हें अपने लिए बैट बनाने को कह दिया. अबुलेस को गांव में ही पॉपुलर विलो का सूखा पेड़ मिल गया. उन्होंने लकड़ी के कुछ बैट बनाकर गांव के कुछ साथियों को फ्री में ही बांट दिया.

इन बैट्स की क्वालिटी बेहतरीन थी. लोकल मार्केट में बिकने वाले बैट्स से अच्छी. ये बात दूसरे क्रिकेट प्रेमियों तक पहुंची. अबुलेस के पास बैट खरीदने लोग आने लगे. अबुलेस ने बिना संशाधन के बैट बनाए और 800 रुपये में बेच दिए. इसके बाद उन्होंने कुछ और साथियों को जोड़ा और लग गए काम पर.

अबुलेस के मुताबिक़, दैनिक भास्कर में रिपोर्ट छपने के बाद वह फेमस हो गए. जिले के डीएम भी उनकी मदद कर रहे हैं. अब वह अपने 10 साथियों के साथ कंपनी का नाम, बैनर और स्टैंप बना लिए हैं. कंपनी का जीएसटी नंबर भी मिल गया है. प्रशासन भी डीपीआर के बाद आर्थिक मदद के लिए तैयार है.

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