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यह बहुत ही भारी-भरकम पत्थर आखिर कैसे सदियों से टिका है ढलान पर, जानेंगे तो उड़ जाएंगे होश


मंदिरों का शहर महाबलीपुरम तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई से 55 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है। इसे महाबलीपुरम का रथ मंदिर भी कहते है।इसका निर्माण नरसिंह बर्मन प्रथम ने कराया था। प्रांरभ में इस शहर को मामल्लापुरम कहा जाता था। तमिलनाडु का यह प्राचीन शहर अपने भव्य मंदिरों, स्थापत्य और सागर-तटों के लिए बहुत प्रसिद्ध है।तमिलनाडु के महाबलिपुरम शहर में मौजूद उस अति प्राचीन पत्थर के बारे में तो आप जरूर जानते होंगे, जो एक ढलान पर करीब 1200 साल से आश्चर्यजनक रूप से टिका हुआ है। यह बड़े से बड़े आंधी-तूफान में भी न तो कभी हिलता है और ना ही कभी लुढ़कता है। ठीक ऐसा ही एक पत्थर म्यांमार में भी है, जो करीब 25 फीट ऊंचा है। 

इस पत्थर की भी खासियत यही है कि यह सदियों से चमत्कारिक रूप से एक दूसरे पत्थर के ढाल पर अटका हुआ है। इसे भी आंधी-तूफान तक नहीं हिला सके हैं।करीब 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह भारी-भरकम पत्थर किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह म्यांमार के बौद्धों का प्रमुख तीर्थ स्थल है। सोने की तरह दिखने वाले इस पत्थर को 'गोल्डन रॉक' या 'क्यैकटियो पगोडा' कहा जाता है। दरअसल, लोगों ने इसपर सोने की पत्तियां चिपकाकर इसे सोने जैसा ही बना दिया है। इसी वजह से इसका नाम 'गोल्डन रॉक' पड़ा।

इस पत्थर को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं कि आखिर कैसे यह एक चट्टान के किनारे से चिपका हुआ है। माना जाता है कि इस पत्थर के पास जो भी साल में तीन बार जाता है, उसकी गरीबी और सारे दुख दूर हो जाते हैं। यह भी मान्यता है कि यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है, वो पूरी जरूर होती है।

माना जाता है कि यह भारी-भरकम पत्थर भगवान बुद्ध के बालों पर टिका हुआ है और इसी वजह से यह अपने स्थान से कभी हिलता नहीं है। वैसे तो इसके बारे में कोई नहीं जानता कि यह पत्थर कब से यहां ऐसे ही टिका हुआ है, लेकिन माना जाता है कि 'क्यैकटियो पगोडा' का निर्माण 581 ईसा पूर्व में हुआ था। हालांकि कुछ लोग यह भी मानते हैं कि 11वीं सदी में एक बौद्ध भिक्षु ने भगवान बुद्ध के बालों के सहारे इस पत्थर को ऐसे ढलान पर टिका कर रख दिया था।

मान्यता है कि कोई महिला ही इस पत्थर को यहां से हिला सकती है या स्थानांतरित कर सकती है। इस वजह से महिलाओं को इस सुनहरे पत्थर को छूने की अनुमति नहीं है, वो सिर्फ दूर से ही इसे देख सकती हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि पत्थर के पास कोई महिला न आए, तीर्थ स्थल के अंदर आने वाले गेट पर हर वक्त सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं और नजर बनाए रखते हैं।

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