Breaking News

बाढ़ से घिरे गांव में बच्चे का जन्म, दो नदियां पार कर पहुंचीं महिला ने बचाई जान


दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच बाढ़ से घिरा था यह गांव। यहां पहुंचने का सिर्फ एक ही रास्ता था, वह भी दुर्गम था। रास्ते में दो नदियों को पार करना भी मजबूरी थी। ऐसी ही हर रोज की स्थिति नासीपुर गांव की रहती है। औबेदुल्लागंज से सलकनपुर मार्ग पर है यह गांव। इसी गांव में मजदूर दुर्गेश उइके की पत्नी मनीषा ने शनिवार शाम को एक बच्चे को जन्म दिया था। न कोई लेडी डाक्टर की व्यवस्था थी न दूर-दूर तक कोई अस्पताल।

ऐसे हालातों में बच्चे की गर्भनाल काटी जाना थी। यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो बच्चे और उसकी मां की जान को खतरा हो सकता था। ऐसी स्थिति में एक महिला की बहादुरी और हिम्मत काम आई।

भगवान बनकर आई बुजुर्ग महिला: ऐसी स्थिति में जब कोई मददगार नहीं मिला तो किसी दुर्गेश के परिवार को बमनई गांव निवासी दाई पचास वर्षीय कलाबाई के बारे में पता चला। उन्होंने शनिवार को गांव से निकले और शाम को कलाबाई से संपर्क किया। जब तक गांव के आसपास नदियों में पानी बढ़ गया था।

कलाबाई ने भी तत्परता दिखाई और शाम को 5 बजे को ही नासीपुर गांव के लिए निकल पड़ी। दुर्गम रास्ता पार करते हुए कलाबाई ने पहले तो 20 फीट गहरी नदी को पार किया, जो पुल के ऊपर से बह रही थी। उन्हें रस्सी के सहारे नदी पार कराई गई। अब कलाबाई के सामने दूसरी बड़ी चुनौती थी। आगे एक और नदी उफान मार रही थी। लगातार बारिश से जल स्तर भी बढ़ रहा था। कलाबाई ने यहां भी हिम्मत नहीं हारी। वो नदी पार नहीं कर पा रही थी, उन्होंने नदी के किनारे एक सूने मकान में ही रात गुजारी और रविवार सुबह 6 बजे नासीपुर गांव पहुंच गई। कलाबाई ने सबसे पहले बच्चे की नाल काटकर बच्चे को मां से अलग किया उसके बाद संक्रमण से बचाव के जरूरी उपाय किए। अब मां और बेटे दोनों ही स्वस्थ हैं। हर कोई कलाबाई की सराहना कर रहा है।

दाई मौसी की सलाह काम आई

महिला के पति दुर्गेश ने पत्रिका को बताया कि रात में बाढ़ के कारण दो नदी के बीच फंसी दाई कलाबाई ने परिजन को सलाह दी कि गर्भनाल को बांध दो, ताकि खून का संचालन बंद हो जाए। दुर्गेश उइके ने बताया कि दाई मौसी रात में सलाह नहीं देती और नदी पार कर दूसरे दिन सुबह गांव नहीं पहुंचती तो कुछ भी हो सकता था। दुर्गेश के मुताबिक जैसी ही नदी उतरी तो उसने जिम्मेदारों को फोन कर प्रसव होने की जानकारी दी, लेकिन दो दिन में नासीपुर कोई नहीं पहुंचा था।

10 साल पहले लिया था एक माह का प्रशिक्षण

कलाबाई ने बताया कि उन्होंने 10 साल पहले औबेदुल्लागंज अस्पताल में एक माह का प्रशिक्षण लिया था। वे इमरजेंसी में पास के तीन-चार गांव में प्रसव कराती रहती हैं।

No comments