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रूस की दूसरी कोरोना वैक्सीन का ट्रायल पूरा, 15 अक्टूबर को होगी लॉन्च


वैक्सीन की दौड़ में फिलहाल रूस सबसे आगे है. आम जनता को Sputnik V वैक्सीन उपलब्ध कराने के बाद रूस अब एक और वैक्सीन लॉन्च करने की तैयारी में है. रूस की इस वैक्सीन का नाम एपीवैककोरोना (EpiVacCorona) है. क्लिनिकल ट्रायल में ये वैक्सीन सफल साबित हुई है. उम्मीद जताई जा रही है कि ये वैक्सीन 15 अक्टूबर को लॉन्च की जाएगी.

ये वैक्सीन साइबेरिया के वेक्टर स्टेट वायरॉलजी रिसर्च सेंटर ने बनाई है. रिसर्च सेंटर का कहना है कि प्रायोगिक वैक्सीन एपीवैककोरोना अपने प्रारंभिक चरण के ट्रायल में कारगर साबित हुई है. वेक्टर के प्रेस विभाग ने इंटरफेक्स समाचार एजेंसी को बताया, 'क्लिनिकल ट्रायल के पहले दो चरणों में एपीवैककोरोना वैक्सीन सुरक्षित और असरदार रही है.'

वेक्टर रिसर्च सेंटर का कहना है कि एपीवैककोरोना वैक्सीन इम्यून रिस्पॉन्स पर काम करती है और पोस्ट अप्रूवल क्लिनिकल ट्रायल पूरा होने के बाद ही वैक्सीन की क्षमता पर अंतिम निष्कर्ष देना संभव होगा. रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको का कहना है कि मंत्रालय की तरफ से वेक्टर की इस वैक्सीन को तीन सप्ताह में मंजूरी दी जा सकती है.

वेक्टर ने कहा कि रजिस्ट्रेशन के बाद साइबेरिया में 5,000 वॉलंटियर्स पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा. इसके अलावा एक अलग क्लिनिकल ट्रायल का आयोजन होगा जिसमें 60 साल से अधिक उम्र के 150 वॉलेंटियर्स को शामिल किया जाएगा. इसके बाद वेक्टर 18 से 60 साल के बीच के उम्र वाले 5000 वॉलंटियर्स पर प्लेसबो कंट्रोल्ड ट्रायल भी शुरू करेगा.

वेक्टर का कहना है कि इसे बनाने का काम नंवबर में शुरू किया जाएगा. शुरूआत में एपीवैककोरोना की 10,000 डोज तैयार की जाएगी.

रूस पहले ही कोरोना की पहली वैक्सीन Sputnik V लॉन्च करने वाला देश बन चुका है. इतना ही नहीं रूस अब वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के शुरूआती नतीजे भी जल्द जारी करने वाला है. Sputnik V वैक्सीन बनाने वाले गैमेलेया इंस्टीट्यूट के प्रमुख अलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने रॉयटर्स को ये जानकारी दी है.

रूस की वैक्सीन में निवेश करने में करने वाले सॉवरेन वेल्थ फंड ने अक्टूबर के अंत या नवंबर तक वैक्सीन के नतीजे आ जाने की उम्मीद जताई है. आपको बता दें कि पूरी दुनिया में वैक्सीन के ट्रायल जारी हैं. ऐसे में रूस वैक्सीन के तीसरे चरण के नतीजे घोषित करने वाला पहला देश बन सकता है.

गैमेलेया इंस्टीट्यूट के प्रमुख अलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग का कहना है कि ट्रायल के नतीजों को लेकर लोगों में दिलचस्पी है और लोग लंबे से इसका इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वैक्सीन की डोज लेने वाले 40,000 वॉलंटियर्स को 180 दिनों की निगरानी में रखा गया है. अब उनकी टीम अंतिम परिणामों का मिलान करेगी और फिर इसे एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित कराया जाएगा.

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