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दादा का सपना पूरा करने के लिए बिहार के लड़के ने पास की नीट


बिहार के लड़के पृथ्वीराज सिंह ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में ऑल इंडिया रैंक -35 हासिल किया है। इस साल टॉप-50 में जगह पाने वाले बिहार के अकेले छात्र हैं। पृथ्वीराज ने 720 में से 705 यानी 99.996 फीसदी स्कोर कर शानदार कामयाबी हासिल की है।

पटना जिले के पुनपुन ब्लॉक से आने वाले पृथ्वीराज सिंह के दादा जी का सपना था कि उनका पोता डॉक्टर बने। इसी सपने को पूरा करने के लिए पृथ्वीराज ने अपने पहले प्रयास में ही नीट 2020 में कामयाबी हासिल की है।

18 वर्षीय पृथ्वीराज ने बताया, "मेरे दादा जी राज कुमार सिंह एक रिटायर्ड हाईस्कूल क्लर्क हैं। उन्होंने ने ही मेरे अंदर डॉक्टर बनने का सपना जगाया था। मैं अपने बचपन के दिनों को याद करता हूं तो याद आता है कि हमारे गांव में उन दिनों केवल एक ही डॉक्टर होता था, जो सबका इलाज करता था। इस प्रकार से लोगों के लिए मेडिकल सुविधा पाना आसान बात नहीं थी। यही कारण है कि मैंने डॉक्टर बनने का फैसला किया।"

पृथ्वीराज की ख्वाहिश है कि वह एम्स दिल्ली में एडमिशन लेकर न्यूरोलॉजिस्ट बनें। वर्तमान में वह अपने परिवार के साथ कोटा में रह रहे पृथ्वीराज ने कहा कि वह एक सफल डॉक्टर बनने के बाद अपने गृह जनपद में ही काम करना चाहेंगे।

अपनी सफलता का श्रेय वह कोटा को देते हैं। वह कहते हैं कि कोटा की हवा में ही कुछ ऐसा है जोकि प्रत्येक अभ्यर्थी को कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।

पृथ्वीराज रोजाना 14 घंटे करते थे पढ़ाई-
पृथ्वीराज ने बताया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने कोटा के एक प्राइवेट संस्थान में एडमिशन लिया था। रोजाना 8 घंटे कोचिंग में बिताने के बाद वह 6 घंटे घर में खुद से भी तैयारी करते थे। उन्होंने बताया , 'मैंने बहुत सारे मॉक टेस्ट पेपर सॉल्व किए जिससे कि क्वेश्चन पैटर्न को समझने में मदद मिली और पहले प्रयास में ही परीक्षा पास की।'

पृथ्वीराज ने इसी साल 12वीं कक्षा में 95.2 फीसदी अंक हासिल किए थे। कोरोना संकट के दौरान में तैयारी की बात करें तो उन्होंने कहा कि मैँ चिंतित था। लॉकडाउन के दौरान लगातार पढ़ाई का रूटीन गड़बड़ा गया था। पढ़ाई में ध्यान लगाना काफी मुश्किल हो रहा था। कुछ समय के बाद मैंने खुद को तैयार किया और रिवीजन करना शुरू किया। ताजगी पाने के लिए वह बीच-बीच में खेलते थे।

उनके पिता धर्मेंद्र सिंह पेशे से एक बैंक मैनेजर हैं। उनकी मां शशि नंदनी एक गृहणी हैं। दोनों अपने बेटे की मदद के लिए 2018 में कोटा शिफ्ट हो गए थे जिससे कि बेहतर तैयारी हो सके। पृथ्वीराज की मां ने बताय कि वह अपने बेटे को अकेले बाहर पढ़ने के लिए भेजने को तैयार नहीं थे। इसीलिए उसकी पढ़ाई और देखभाल के लिए हम उसके साथ कोटा आ गए थे।

बेटे की कामयाबी से खुश पिताप धर्मेंद्र हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया , हमारे में परिवार में मेरा बेटा ही पहला ऐसा लड़का है जिसने मेडिकल की परीक्ष दी है। मुझे बहुत खुशी हुई हैं क्योंकि बेटे ने मेरे पिता का सपना पूरा किया है। कामना करता हूं कि वह एक सफल डॉक्टर बने और मानवता की सेवा करे।

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