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शरीर में दिखें ये 5 लक्षण तो समझ लें कि किडनी हो रही है खराब, ऐसे होती है शुरुआत


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किडनी के मरीजों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। वैसे तो किडनी में खराबी आने के कई कारण हैं, लेकिन भोपाल वासियों के लिए इसकी मुख्य वजह है साल 1984 में शहर में स्थित यूनियन कार्बाइड से निकली ज़हरीली गैस। ये इतनी बड़ी घटना थी कि, जिसे 20वीं सदी की सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल त्रासदी माना गया। इस घटना में लगभग 20 हज़ार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। साथ ही, अब भी उस गैस के कारण शहर का जल और वातावरण अन्य शहरों के मुकाबले काफी प्रदूशित है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युनियन कार्बाइड से रिसी मिथाइल आइसोसाइनाइट गैस से होने वाले नुकसान के कारण यहां का पानी और वायु प्रदूषित है, जिसके चलते यहां लोगों को लंबे समय तक किडनी की समस्या से जूझना पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, ये गैस इतनी प्रभावी थी कि, इसके संपर्क में आने वाले लोगों की तीन पीड़ियों तक इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके प्रभाव से गैस पीड़ितों की रोग प्रतिरोधक छमता काफी कम हो जाएगी, जिससे कोई भी शारिरिक हीनता संभव है। इनमें प्रमुख तौर पर कैंसर और किडनी की समस्या का खतरा काफी ज्यादा है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए एक खास मंत्रालय भी गठित किया, जिसे गैस राहत विभाग नाम दिया गया। इसके तहत गैस पीड़ितों का इलाज और उनसे जुड़ी समस्याओं का निदान किया जाता है। साथ ही, अगर किसी गैस पीड़ित की कैंसर या किडनी की बीमारी से मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार के सदस्यों को आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है। हालांकि, किडनी की बीमारी की समस्या सिर्फ गैस पीड़ित तक ही सीमित नहीं है। बल्कि, शहर की फिजा में सांस लेने वालों और यहां का ज़मीनी पानी पीने के इस्तेमाल में लेने वालों के साथ भी काफी ज्यादा है।

वैसे तो किडनी की बीमारी अब विश्वव्यापी समस्या बन चुकी है। पिछले कुछ सालों में इस समस्या के कारण हुई मौतों में काफी तेज़ी से इजाफा हुआ है। हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक, देशभर में करीब 14 फीसदी महिलाएं और 12 फीसदी पुरूष किडनी की समस्या जूझ रहे हैं। साथ ही हर साल लगभग 4 से 5 हज़ार लोगों की जान सिर्फ किडनी की खराबी के कारण चली जाती है। अगर बात पूरी दुनिया की करें तो लगभग 19.5 करोड़ लोग किडनी की समस्या से पीड़ित हैं। किडनी की बीमारी आज पूरी दुनीया में इतना विकराल रूप ले चुकी है बावजूद इसके लोग किडनी से जुड़ी समस्याओं के लक्षण समझ नहीं पाते और डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जबतक काफी ज्यादा समय निकल जाता है। तो आइये जानते हं उन खास संकेतों के बारे में जिन्हें पहचान कर हम समय रहते किडनी का इलाज करके किसी गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।

किडनी का महत्व दरअसल, किडनी को हम हमारे शरीर का फिल्टर कह सकते हैं, क्योंकि ये हमारे शरीर में सफाई का काम करती है। ये शरीर से गंदगी बाहर निकालने वाले अंगों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। हमारे शरीर में दो किडनियां होती हैं, जिनका मुख्य काम शरीर में मौजूद खून की सफाई करना है। हमारी दोनों किडनियों में छोटे-छोटे लाखों फिल्टर होते हैं जिन्हें मेडिकल भाषा में नेफ्रोंस कहा जाता है। नेफ्रोंस हमारे खून को साफ करते हैं, साथ ही खून में मौजूद हानिकारक तत्व पेशाब के ज़रिये शरीर से बाहर कर देते हैं। किडनी के अन्य कामों में लाल रक्त कण का बनना और फायदेमंद हार्मोंस रिलीज करना शामिल हैं। किडनियों द्वारा रिलीज किए गए हार्मोंस द्वारा ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है। साथ ही किडनी हमारे शरीर में मौजूद हड्डियों को विटामिन डी पहुंचाने का काम भी करती है।

शरीर में पानी और अन्य जरूरी तत्व जैसे मिनरल्स, सोडियम, पोटेसियम और फॉस्फोरस का रक्त में संतुलन बनाए रखने में किडनी का महत्वपूर्ण योगदान है। हालांकि, उम्र बढ़ने पर किडनी की कार्यशीलता वैसे ही कम होने लगती है, लेकिन, ऊपर बताए कारणों के चलते कुछ लोगों को समय के पहले ही किडनी से जुड़ी समस्या से जूझना पड़ता है। इन समस्याओं का कारण किडनी की बीमारियों से जुड़ा पारिवारिक इतिहास, डायबिटीज , हाई ब्लडप्रेशर , नशा और अधिक वजन हो सकता है। इसीलिए आज हम आपसे कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बात करेंगे, जिसके कारण किडनी की समस्या होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।


ये लक्षण देते हैं किडनी की बीमारी के संकेत

-युरिनरी फंक्शन में बदलाव किडनी में होने वाली किसी भी समस्या के कारण पेशाब के रंग, मात्रा और कितने बार पेशाब आती है, इन चीजों में बदलाव आ जाता है। साथ ही, बार बार पेशाब आना। कई बार पेशाब की इच्छा होना परंतु बाथरूम जाने पर पेशाब न आना, ज्यादा गहरे रंग का पेशाब आना, पेशाब में ज्यादा झाग या बुलबुले बनना, पेशाब में खून आना, पेशाब के दौरान दर्द या जलन होना आदि समस्याएं शामिल हैं।

-शरीर में सूजन किडनियों का मुख्य काम शरीर से गंदगी बाहर करना है। इसके अलावा शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ बाहर करना भी है। जब किडनियों की कार्यप्रणाली अवरुद्ध होती है, तो शरीर से बाहर न निकलने पाने वाली गंदगी और तरल पदार्थ समस्याएं पैदा करने लगता है। इस वजह से शरीर में सूजन भी दिखाई देने लगती है। ये सूजन हाथों, पैरों, जोड़ों, चेहरे और आंखों के नीचे वाले हिस्से पर खास तौर पर होती है। शरीर पर किसी तरह की सूजन दिखे तो उसे उंगली से दबाकर देखें। शरीर पर डिंपल नुमा निशान दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

-चक्कर और कमजोरी किडनी में किसी तरह की खराबी होने पर शुरुआत में पीड़ित को चक्कर आने की शिकायत होने लगती है। धीरे धीरे ये समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। आप हमेशा थकावट और कमजोरी महसूस करने लगते हैं। ये लक्षण खून की कमी और खून में गंदगी की वजह से उत्पन्न होते हैं। शरीर में एनीमिया की स्थिति बनने से सर घूमना, हल्का सरदर्द, संतुलन न बनना जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। शरीर में स्वच्छ खून ना होने से धीरे धीरे खून की कमी होने लगती है। इससे हो जाता है, जिसके कारण दिमाग तक जरूरी मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। बाद में ये समस्या याददाश्त भी कमजोर कर सकती है।

-पीठ के निचले हिस्से में दर्द आपकी पीठ और पेट के किनारों में बिना वजह दर्द महसूस करना किडनी में इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं। जब किडनी सही तरीके से काम करना बंद कर देती हैं तो आप उसके स्थान पर दर्द महसूस करते हैं। शाथ ही, शरीर में अकड़न भी होने लगती है। पीठ में नीचे की तरफ होने वाले दर्द का कारण किडनी में पथरी भी हो सकती है। पोलिसासिस्टिक रेनाल डिसीज एक वंशानुगत बीमारी है, जिससे किडनी के सिस्ट में पानी भर जाता है, जिससे पीठ में नीचे की ओर एक तरफ या पेट में दर्द होने लगता है।

-ड्राइ स्किन में खुजली अचानक त्वचा का फटना, रेशेज होना, अजीब लगना और बहुत ज्यादा खुजली महसूस होना शरीर की गंदगी के एकत्रित होने के कारण हो सकता है। किडनी के निष्प्रभावी हो जाने से शरीर में कैल्शि‍यम और फॉस्फोरस की कमी आती है, जिसके कारण बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है। हालांकि, आमतौर पर स्वस्थ त्वचा भी फटने लगती है, खुरदुरी हो जाती है और खुजली होती है। इसलिए चिकित्सक से परामर्श ज़रूर कर लें।

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