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99% लोग नहीं जानते बबूल के ये औषधीय लाभ – ज़रूर पढ़िए और शेयर कीजिये!


बबूल (Babool) आयुर्वेद ही नहीं, बल्कि सामान्य जन-जीवन में भी बहुत काम की चीज़ है. आज मैं आपको इसी के बारे में बता रही हूँ. बबूल के फायदे जानने के लिए पढ़ते रहिये.
दस्त में उपयोगी

बबूल की पत्तियों का प्रयोग दस्त में लाभकारी होता है। पत्तियों को काले और सफेद जीरे के साथ मिलाकर पीने से या इसके चूर्ण को खाने से दस्त में लाभ होता है।
चोट में लाभदायक

बबूल के पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव को शीघ्रता से भरने में सहायता मिलती है। इसमें ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो संक्रमण और बीमारियों को रोकने का कार्य करते हैं.
खाज-खुजली (एक्ज़ेमा) के लिए

करीब 25 ग्राम बबूल की छाल और आम के पेड़ की छाल को पानी में उबालिए। शरीर के प्रभावित हिस्से को इस पानी का भाप दीजिये। इसके बाद उस हिस्से पर थोड़ा सा देसी घी लगाकर छोड़ दीजिये।
पाचन क्रिया को ठीक करने में सहायक

बबूल के पत्तों से बने हुए काढ़े को पीने से पाचन क्रिया में लाभ होता है और साथ ही यह शरीर को मजबूत भी बनाता है।

टोनसिल्स में भी फायदेमंद अगर आप कभी भी टोनसिल्स की समस्या से परेशान हो तो बबूल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए आपको बस इसकी पत्तियों का काढ़ा बना कर, उसमे सेंधा नमक मिलाकर उसका सेवन करना होगा। यह आपको बहुत ही जल्द आराम देगा।
शुक्राणुओं की वृद्धि में सहायक

बबूल के फलों का सेवन अगर सुबह खाली पेट किया जाए तो यह शुक्राणुओं को बढ़ने में सहायता करता है और इसका सेवन व्यक्ति को बलवान बनाता है। नपुंसकता को दूर करने में भी यह बहुत सहायक है।
हड्डी टूटने पर

बबूल के बीज को पीस कर केवल 3 दिन भी अगर शहद के साथ लिया जाये तो इससे टूटी हुई हड्डी जुड़ने में बहोत मदद मिलती है. इतना ही नहीं, इससे हड्डियाँ वज्र के सामान मजबूत हो जाती है.

ज्यादा पेशाब आने पर बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखा कर, घी में तल कर इसका पाउडर बना लेना चाहिए. इस पाउडर को रोजाना 3 ग्राम लेने से ज्यादा पेशाब आने की समस्या ख़त्म हो जाती है.
मुँह के रोगों के लिए

बबूल की छाल को बारीक पीस कर इसे गरम पानी में मिला कर कुल्ला करने से मुँह की सभी समस्याएं जल्द ही ख़त्म हो जाती हैं और दोबारा नहीं होंगी.

गले के रोग बबूल के कुछ पत्ते और छाल को बड की छाल के साथ बराबर मात्रा में मिला कर सुखा कर पीस कर इसका पाउडर बना लीजिये. इस पाउडर को आधा चम्मच 1 गिलास गरम पानी में मिला कर गरारे करने से गले की समस्याएं जैसे सूखापन, खराश और छाले ख़त्म हो जाते हैं.

बांझपन दूर करने के लिए बबूल यानि कीकर के पेड़ के तने पर एक छोटा सा फोड़ा सा निकलता है जिसे बांदा कहते हैं. इस बांदे को लेकर पीस लें और चूरन बना लें. इस चूरन को छाया में सुखा लें और ज़रूरत ले तो और बारीक कर ले इन ताकि खाने लायक बन जाये.

माहवारी ख़त्म होने के अगले दिन से तीन दिन तक इस चूरन का आधा चम्मच सेवन रोजाना कीजिये. इससे गर्भ ठहरने के आसार बढ़ जाते हैं.

वजन कम करने के लिए

बबूल की छाल को उबाल कर उस पानी को पीने से वजन कम करने में भी मदद मिलती है.

हम चाहते हैं कि हर भारतीय अंग्रेजी दवाओं की बजाय घरेलु नुस्खों और आयुर्वेद को ज्यादा अपनाये.

अगर आपको इससे कोई फायदा लगे तो इसे शेयर करके औरों को भी बताएं.

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