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यहां मां जगदंबा झूलती हैं झूला, प्रसाद के साथ चढ़ाते हैं ये खास चीज


मां भगवती का हर मंदिर अपने इतिहास, परंपरा और उनसे जुड़ी आस्था की दृष्टि से निराला है। कहीं मां ज्वाला के रूप में धरती से प्रकट होती हैं तो कहीं अपनी शक्ति से शहंशाहों को भी शिकस्त देती हैं। तर्क और आधुनिक विज्ञान मां के कई रहस्यों को आज तक नहीं जान सके हैं।

वास्तव में यहां सिर्फ आस्था की जरूरत होती है। आस्था की शक्ति से मां के दरबार में हुए चमत्कारों के साक्षी असंख्य लोग हैं। भगवती का ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर उत्तराखंड के रानीखेत में स्थित है।

घने जंगलों बीच यहां भगवती झूला देवी के रूप में विराजमान हैं। मां का यह मंदिर करीब 700 साल पुराना बताया जाता है। यहां जिस व्यक्ति पर मां झूला देवी की कृपा हो जाती है, उसके सभी दुखों, परेशानियों का निवारण हो जाता है। यहां मां के मंदिर में अनेक घंटियां भी लटकी हुई हैं।

भक्तों की पुकार पर दौड़ी आईं मां दुर्गा
मंदिर के इतिहास के बारे में श्रद्धालुओं का कहना है कि करीब 700 साल पहले यहां शेर-चीते जैसे कई हिंसक पशुओं का आतंक था। वे ग्रामीणों को नुकसान पहुंचाते तथा उनके पशुधन को भी निशाना बनाते थे। इससे परेशान होकर ग्रामीणों ने मां भगवती से विनती की।

भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने एक व्यक्ति को सपने में दर्शन दिए और कहा कि एक विशेष स्थान पर उनकी मूर्ति भूमि में दबी हुई है। उसे बाहर निकालो। वह व्यक्ति पिलखोली गांव का निवासी था।

सुबह उसने अन्य ग्रामीणों को सपने के बारे में बताया। सपने की बात सुनकर लोगों ने विभिन्न मत प्रकट किए। कोई उसे स्वप्न मात्र समझकर भूल जाने की सलाह दे रहा था तो किसी ने कहा, एक बार सपने की सच्चाई जाननी चाहिए।

इसलिए बताए गए स्थान पर खुदाई शुरू की गई। वहां मां भगवती की एक सुंदर प्रतिमा निकली। यहां मां का मंदिर बनवाया गया और उनकी पूजा-अर्चना शुरू की गई। कहते हैं कि उसके बाद कभी जंगली पशुओं ने ग्रामीणों या उनके पशुधन को परेशान नहीं किया।

...और मां बन गईं झूला देवी
मां के झूला झूलने के बारे में एक और कथा प्रचलित है। माना जाता है कि एक बार श्रावण मास में माता ने किसी व्यक्ति को स्वप्न में दर्शन देकर झूला झूलने की इच्छा जताई। ग्रामीणों ने मां के लिए एक झूला तैयार कर उसमें प्रतिमा स्थापित कर दी।

उसी दिन से यहां मां झूला देवी के नाम से पूजी जाने लगी। यहां हर रोज अनेक श्रद्धालु आते हैं लेकिन नवमी और नवरात्र के अवसर पर अपार भीड़ उमड़ती है। यहां काफी संख्या में घंटियां भी बंधी हुई हैं। वास्तव में ये घंटियां श्रद्धालु चढ़ाते हैं।

जो श्रद्धालु मां के दरबार में आकर उनसे मन्नत मांगता है और जब उसकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वह उन्हें घंटी चढ़ाता है। यह घंटी सुख, सफलता और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। इस मंदिर में देश-विदेश से अनेक श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं और स्वयं को धन्य समझते हैं।

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